केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के शाम 4 बजे जारी होने वाले दैनिक बुलेटिन के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 की अवधि में दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 167.6 दर्ज किया गया, जबकि 2025 की समान अवधि में यह 164.3 था। इसी तरह जनवरी से अगस्त तक का औसत AQI 175.7 रहा, जो पिछले साल के 171.7 से अधिक है। आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि दिल्लीवासियों ने इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में अधिक प्रदूषित हवा में सांस ली है।
CAQM पर आंकड़े छिपाने का आरोप
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने वर्ष 2026 में जनवरी से अगस्त के दौरान मासिक आंकड़ों से जुड़ी कोई भी विज्ञप्ति जारी नहीं की और केवल 30 सितंबर को एक विज्ञप्ति प्रकाशित की। इसमें भी जनवरी से सितंबर का औसत AQI गायब था, जिसे वर्ष 2025 की विज्ञप्ति में दिखाया गया था। इसके अतिरिक्त, जहां 2025 में प्रदूषण की तुलना वर्ष 2018 के आंकड़ों से की जाती थी, वहीं इस बार इसे घटाकर 2022 से दिखाया गया है, जिससे हवा की वास्तविक स्थिति छिप सके।
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि वर्ष 2026 के फरवरी, मार्च, जुलाई और अगस्त - ये चारों महीने 2025 की तुलना में अधिक प्रदूषित रहे। विशेष रूप से जुलाई 2026 का औसत AQI 117.8 तक पहुंच गया, जबकि 2025 के जुलाई में यह 78.4 था। आयोग के अपने रिकॉर्ड के अनुसार, यह वर्ष 2019 के बाद से दिल्ली में अब तक का सबसे खराब जुलाई साबित हुआ है।
दोनों वर्षों में निरंतर आंकड़े देने वाले 39 वायु निगरानी स्टेशनों के रिकॉर्ड से पता चलता है कि 2026 में कुल 796 स्टेशन-घंटों तक AQI पैमाने के अंतिम अंक यानी 500 पर रहा। यह 2025 के 256 स्टेशन-घंटों की तुलना में तीन गुना अधिक है। इन अति-प्रदूषित घंटों में PM2.5 का औसत स्तर 439 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मापा गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 24 घंटे के सुरक्षा मानक से 29 गुना ज्यादा है।
वर्ष 2026 के पहले 273 दिनों में से केवल 60 दिन ही ऐसे रहे जब हवा 'अच्छी' या 'संतोषजनक' श्रेणी में दर्ज की गई, जबकि 2025 में ऐसे दिनों की संख्या 75 थी। आयोग ने अपनी विज्ञप्ति में इस साल "सबसे कम PM2.5 स्तर" का दावा किया, जबकि उसने स्वयं 2025 और 2026 दोनों के लिए PM2.5 का स्तर 69 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर ही दिखाया है।
सांसद श्री अजय माकन ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि जनता को वायु प्रदूषण के वास्तविक जोखिमों से अवगत न कराना लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने CAQM के गैर-सरकारी सदस्यों, श्री अरविंद वाबले और डॉ. अरुणाभ घोष को पत्र लिखकर मांग की है कि आयोग जनवरी से सितंबर का वास्तविक औसत AQI और महीनेवार आंकड़े सार्वजनिक करे, 2018 से तुलनात्मक तालिका लागू करे और भ्रामक दावों में सुधार करे।