दिल्ली की नई आबकारी नीति से जुड़े मामले में विशेष अदालत द्वारा अरविंद केजरीवाल को राहत दिए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है. अदालत ने कहा कि आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिले. इसके तुरंत बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया. कांग्रेस ने भाजपा पर चुनावी फायदा उठाने का आरोप लगाया, जबकि केजरीवाल ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल उठाए कि आखिर उनके नेता जेल क्यों नहीं गए.
राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच एजेंसी आरोपों को साबित करने के लिए जरूरी प्रारंभिक आधार भी पेश नहीं कर सकी. अदालत ने यह भी माना कि पेश किए गए साक्ष्य कानूनी कसौटी पर खरे नहीं उतरते. इसी आधार पर केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को राहत दी गई. अदालत की टिप्पणी ने मामले को नया मोड़ दे दिया.
फैसले के बाद कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भाजपा पर तीखा प्रहार किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल चुनावी रणनीति के तौर पर किया जा रहा है. खेड़ा ने कहा कि जैसे-जैसे गुजरात और पंजाब में चुनाव नजदीक आएंगे, कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मामलों की रफ्तार बढ़ेगी. उन्होंने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया.
कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी के नेता जेल गए, लेकिन कांग्रेस के बड़े नेताओं के साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ. उन्होंने रॉबर्ट वाड्रा, राहुल गांधी और सोनिया गांधी का नाम लेते हुए पूछा कि क्या वे जेल गए. केजरीवाल ने कहा कि कांग्रेस को ऐसे सवाल उठाने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए.
इस घटनाक्रम के बीच राजनीतिक बहस और तेज हो गई है. भाजपा पर विपक्ष लगातार एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाता रहा है. वहीं भाजपा इन आरोपों को खारिज करती है. अब निगाहें इस बात पर हैं कि आगामी चुनावों में यह मुद्दा किस तरह असर डालेगा और राजनीतिक दल इसे किस रूप में जनता के सामने रखेंगे.