सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड के वनांचल ग्राम पंचायत कालामांजल ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है. कभी पानी की गंभीर समस्या से जूझने वाला यह गांव अब सालभर जल उपलब्धता के लिए जाना जा रहा है. जल संरक्षण के प्रभावी उपायों ने न केवल ग्रामीणों की मुश्किलें कम की हैं, बल्कि गांव के विकास को भी नई दिशा दी है.
कुछ वर्ष पहले तक कालामांजल में बारिश का अधिकांश पानी बहकर निकल जाता था. गर्मी शुरू होते ही कुएं और अन्य जल स्रोत सूखने लगते थे. पेयजल की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाता था. खेती प्रभावित होती थी और मवेशियों के लिए भी पानी जुटाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता था.
स्थिति को बदलने के लिए विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत गांव में कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम का निर्माण कराया गया. इन संरचनाओं का उद्देश्य वर्षा जल को रोकना, भूजल का पुनर्भरण बढ़ाना और मिट्टी के कटाव को रोकना था. इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब गांव में साफ दिखाई दे रहा है.
जल संरक्षण संरचनाओं के कारण वर्षा का पानी अब बहने के बजाय जमीन में समा रहा है. इससे भूजल स्तर में सुधार हुआ है और गांव का प्रमुख जल स्रोत पूरे वर्ष पानी से भरा रहता है. जंगल से आने वाला मलबा भी गेबियन चेक डैम में रुक जाता है, जिससे जल स्रोत सुरक्षित और स्वच्छ बना रहता है.
गांव के निवासी मनोहर सिंह बताते हैं कि पहले गर्मियों में पानी की तलाश सबसे बड़ी परेशानी होती थी. कई बार दूर से पानी लाना पड़ता था और खेती भी प्रभावित होती थी. अब गांव में पानी की पर्याप्त उपलब्धता होने से लोगों की दिनचर्या काफी आसान हो गई है.
वर्तमान में ग्रामीण इसी जल स्रोत का उपयोग पेयजल, स्नान, कपड़े धोने, मवेशियों को पानी पिलाने और मत्स्य पालन के लिए कर रहे हैं. इससे गांव की आजीविका के नए अवसर भी विकसित हुए हैं और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हुआ है.
ग्राम पंचायत के सरपंच अर्जुन सिंह के अनुसार, योजना का लाभ केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं रहा. निर्माण कार्यों के दौरान 250 से अधिक ग्रामीणों को रोजगार भी मिला. इससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ी और गांव की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली. कालामांजल की यह सफलता बताती है कि सामूहिक प्रयास और प्रभावी जल संरक्षण योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदल सकती हैं.