करीब 43 वर्षों से चले आ रहे महानदी जल विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होती दिखाई दे रही है. छत्तीसगढ़ और ओडिशा ने इस लंबे समय से लंबित विवाद को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार की मध्यस्थता स्वीकार कर ली है. दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के इस रुख से उम्मीद जताई जा रही है कि वर्षों पुराना गतिरोध जल्द समाप्त हो सकता है. फिलहाल दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की प्रस्तावित बैठक की तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन मामले में सकारात्मक माहौल बनने से समाधान की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने संकेत दिए हैं कि महानदी जल विवाद का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जा सकता है. दोनों राज्यों ने केंद्रीय जल आयोग की मध्यस्थता को स्वीकार किया है, जिसे विवाद सुलझाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
महानदी जल विवाद से जुड़े मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त 2026 को महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण में निर्धारित है. हाल के दिनों में न्यायाधिकरण ने दोनों राज्यों के बीच अब तक हुई बातचीत की समीक्षा की थी. इसके बाद दोनों पक्षों ने केंद्र सरकार से मध्यस्थता कराने पर सहमति जताई.
महानदी के जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों का अपना-अपना पक्ष रहा है. छत्तीसगढ़ का कहना है कि कृषि, सिंचाई और औद्योगिक विकास के लिए उसे नदी के जल का उपयोग करने का अधिकार है. वहीं ओडिशा का तर्क है कि गैर-मानसून के दौरान निचले तटीय क्षेत्रों में पानी की कमी गंभीर समस्या बन जाती है, इसलिए नदी के प्रवाह को बनाए रखना जरूरी है. इन्हीं मुद्दों को लेकर वर्षों से दोनों राज्यों के बीच विवाद चला आ रहा है.
महानदी जल विवाद केवल जल बंटवारे का मुद्दा नहीं, बल्कि दोनों राज्यों की राजनीति और किसानों से जुड़े अहम विषयों में भी शामिल है. भाजपा इस पहल को ऐतिहासिक कदम बता रही है और उम्मीद जता रही है कि बातचीत से स्थायी समाधान निकलेगा. वहीं कांग्रेस का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का सबसे बड़ा लाभ दोनों राज्यों की जनता और किसानों को मिलना चाहिए.