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हाथियों ने मचाया आतंक, 10 किलोमीटर की सड़क पर कर लिया कब्जा; इंसानों के लिए रास्त हुए बंद

छत्तीसगढ़ के जशपुर में हाथियों का आतंक देखने को मिल रहा है. हाथियों ने 10 किमी सड़क पर कब्जा कर लिया है और वहां पर जाने वाले लोगों पर हमला भी कर रहे हैं.

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हाथियों ने मचाया आतंक, 10 किलोमीटर की सड़क पर कर लिया कब्जा; इंसानों के लिए रास्त हुए बंद
Courtesy: X

रायपुर: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में इन दिनों हाथियों की मौजूदगी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है. जंगल से सटे गांवों और सड़कों पर हाथियों का डर इस कदर बढ़ गया है कि आम लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. हालात को देखते हुए वन विभाग ने पातेबहाल से जामटोली चौक तक करीब 10 किलोमीटर लंबी सड़क को पूरी तरह बंद कर दिया है.

कुछ दिन पहले इस सड़क से गुजर रहे दो ग्रामीणों के साथ बड़ा हादसा होते-होते बचा. बाइक से जा रहे दोनों युवक अचानक हाथियों के झुंड के सामने आ गए. हाथियों को देखकर वे डर के मारे बाइक छोड़कर भागने लगे, लेकिन झुंड ने उनका पीछा किया. किसी तरह जान बचाकर वे अलग-अलग दिशाओं में भागे. इस घटना के बाद पूरे इलाके में डर का माहौल है.

जंगल से गुजरने वाला खतरनाक रास्ता

यह बंद किया गया रास्ता सतपुरिया जंगल से होकर गुजरता है, जहां पिछले कई दिनों से हाथियों का लगातार आना-जाना बना हुआ है. इसी वजह से इस सड़क पर चलना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया था. स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम ढलते ही इस रास्ते से गुजरने की हिम्मत कोई नहीं करता.

ग्रामीणों की जान बचाने में जुटा वन विभाग

एक अन्य घटना में गांव के दो लोग अपने परिवार के साथ इसी रास्ते से जा रहे थे, तभी हाथियों का झुंड सामने आ गया. जान बचाने के लिए एक व्यक्ति पेड़ पर चढ़ गया, जबकि दूसरा गांव की ओर भाग गया. सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और सावधानी से उसे सुरक्षित नीचे उतारा.

चार-सूत्री रणनीति से हालात पर काबू

लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए वन विभाग ने एक विशेष चार-सूत्री रणनीति अपनाई है. इसके तहत हाथियों की आवाजाही वाले रास्तों पर अस्थायी बैरियर लगाए जाते हैं और जरूरत पड़ने पर ट्रैफिक को दूसरे रास्तों से मोड़ा जाता है. अधिकारियों के अनुसार इलाके में करीब 37 हाथियों का झुंड डेरा जमाए हुए है.

अस्थायी बंद, सुरक्षा सबसे पहले

वन विभाग का कहना है कि सड़क बंद करना स्थायी फैसला नहीं है, बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए किया गया अस्थायी इंतजाम है. जैसे ही हाथी दूसरी जगह चले जाते हैं, रास्ते को फिर से खोल दिया जाता है. इस रणनीति का असर भी दिख रहा है, क्योंकि इस साल जिले में इंसान और हाथियों के बीच टकराव की घटनाएं पहले की तुलना में काफी कम हुई हैं.