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छत्तीसगढ़ में राज्यसभा पहुंचे बीजेपी-कांग्रेस के उम्मीदवार, जानें अब कैसे बदला समीकरण और आगे भी कैसे होगा खेला?

छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो सीटों पर निर्विरोध चुनाव हुआ, जिसमें कांग्रेस की फूलोदेवी नेताम और बीजेपी की लक्ष्मी वर्मा विजयी रहीं. वोटिंग नहीं हुई क्योंकि कोई तीसरा उम्मीदवार नहीं था. इससे राज्य का राज्यसभा गणित बदला है. 

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
छत्तीसगढ़ में राज्यसभा पहुंचे बीजेपी-कांग्रेस के उम्मीदवार, जानें अब कैसे बदला समीकरण और आगे भी कैसे होगा खेला?
Courtesy: ani

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को राज्यसभा चुनाव का रोचक नजारा देखने को मिला. कांग्रेस ने अपनी वरिष्ठ नेता फूलोदेवी नेताम को फिर से मौका दिया, जबकि बीजेपी ने प्रदेश की प्रमुख महिला चेहरा लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा भेजा. दोनों प्रत्याशी निर्विरोध चुनी गईं क्योंकि कोई अन्य नामांकन नहीं आया.

नामांकन वापसी के बाद रिटर्निंग अधिकारी ने उन्हें निर्वाचित घोषित किया. मंगलवार को दोनों विधानसभा पहुंचकर प्रमाण-पत्र लेंगी. यह घटना राज्य की राजनीति में नए संतुलन की शुरुआत है, जहां महिलाओं को प्रमुख स्थान मिला है.

फूलोदेवी नेताम का दूसरा कार्यकाल

कांग्रेस ने बस्तर क्षेत्र की मजबूत नेता फूलोदेवी नेताम पर फिर भरोसा जताया है. वे 2020 से राज्यसभा सदस्य हैं और अब दूसरी बार चुनी गई हैं. छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकीं फूलोदेवी पर पार्टी के सभी बड़े नेता एकमत थे. उनकी निर्विरोध जीत से कांग्रेस को मजबूती मिली है. मंगलवार को वे विधानसभा में प्रमाण-पत्र लेकर नई जिम्मेदारी संभालेंगी. उनकी उपस्थिति आदिवासी और महिला मुद्दों पर पार्टी की आवाज मजबूत करेगी. 

लक्ष्मी वर्मा की पहली एंट्री 

बीजेपी ने रायपुर जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा का टिकट दिया. प्रदेश बीजेपी की उपाध्यक्ष रह चुकीं लक्ष्मी पहली बार संसद पहुंच रही हैं. पार्टी ने उन्हें महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए चुना है. निर्विरोध जीत से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है. मंगलवार को वे भी विधानसभा में प्रमाण-पत्र लेंगी. लक्ष्मी वर्मा को संगठन में मजबूत माना जाता है और वे राज्य की नई राजनीतिक ताकत बन सकती हैं.

राज्यसभा सीटों का नया गणित

छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की कुल पांच सीटें हैं. अभी कांग्रेस के तीन और बीजेपी के दो सदस्य हैं. इस जीत से कांग्रेस की संख्या तीन बनी रही, लेकिन अप्रैल-मई में दो सीटें खाली होंगी. उनमें एक-एक सीट कांग्रेस और बीजेपी को मिलेगी. इसके बाद कांग्रेस के दो और बीजेपी के तीन सदस्य रह जाएंगे. इस बदलाव से राज्य में बीजेपी का प्रभाव बढ़ेगा.

भविष्य की संभावनाएं 

यह निर्विरोध चुनाव राजनीतिक दलों की रणनीति दिखाता है. दोनों पार्टियां महिलाओं को आगे बढ़ाकर संदेश दे रही हैं. आने वाले महीनों में खाली होने वाली सीटों पर नए नाम सामने आएंगे. राज्य की राजनीति में यह बदलाव महत्वपूर्ण है. विशेषज्ञ मानते हैं कि बीजेपी का बढ़ता प्रतिनिधित्व विपक्ष के लिए चुनौती बनेगा. छत्तीसगढ़ अब केंद्र में अपनी मजबूत आवाज सुनाने की तैयारी में है.