menu-icon
India Daily

अडाणी ने छत्तीसगढ़ की कोयला खदान को बनाया हरा-भरा, 16 लाख से ज्यादा लगाए पेड़

खनन के बाद खाली पड़े इलाके को फिर से हरा-भरा बनाने का यह बेहतरीन उदाहरण है. प्रति पेड़ 40 पेड़ लगाने का नियम बनाया गया है. यानी खनन के लिए जितने पेड़ काटे जाते हैं, उसके 40 गुना ज्यादा पेड़ दोबारा लगाए जा रहे हैं. कंपनी ने स्थानीय प्रजातियों के पेड़ों को प्राथमिकता दी है. इनमें सल, महुआ, तेंदू, अमलतास और सीधा शामिल हैं. 

antima
Edited By: Antima Pal
अडाणी ने छत्तीसगढ़ की कोयला खदान को बनाया हरा-भरा, 16 लाख से ज्यादा लगाए पेड़
Courtesy: x

छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित पारसा ईस्ट और कांता बसन कोल माइन अब हरे-भरे जंगलों में बदल रहा है. अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने यहां बड़े स्तर पर पेड़ लगाने का काम किया है. कंपनी ने अब तक 16 लाख से ज्यादा पेड़ और पौधे 568 हेक्टेयर क्षेत्र में लगाए हैं. यह माइन राजस्थान राज्‍य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के लिए अडाणी कंपनी द्वारा संचालित किया जा रहा है. 

अडाणी ने छत्तीसगढ़ की कोयला खदान को बनाया हरा-भरा

खनन के बाद खाली पड़े इलाके को फिर से हरा-भरा बनाने का यह बेहतरीन उदाहरण है. प्रति पेड़ 40 पेड़ लगाने का नियम बनाया गया है. यानी खनन के लिए जितने पेड़ काटे जाते हैं, उसके 40 गुना ज्यादा पेड़ दोबारा लगाए जा रहे हैं. कंपनी ने स्थानीय प्रजातियों के पेड़ों को प्राथमिकता दी है. इनमें सल, महुआ, तेंदू, अमलतास और सीधा शामिल हैं. 

16 लाख से ज्यादा लगाए पेड़

लगाए गए पौधों की दर करीब 88 प्रतिशत बताई जा रही है. अडाणी का लक्ष्य है कि इस दशक के अंत तक इस क्षेत्र में 40 लाख से ज्यादा पेड़ लगाए जाएं. इससे न सिर्फ पर्यावरण बहाल होगा बल्कि जैव विविधता भी बढ़ेगी. कंपनी ने 3.5 हेक्टेयर क्षेत्र में एक बड़ा नर्सरी भी विकसित किया है, जहां करीब 5 लाख पौधे तैयार किए जा रहे हैं. 

खास बात यह है कि यहां सल के जंगलों को सफलतापूर्वक दोबारा विकसित किया गया है. केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने लिंक्डइन पर इस पहल की तारीफ करते हुए इसे 'उल्लेखनीय' बताया. मंत्रालय ने लिखा- 'कोयला निकालने के बाद खदान का सफर खत्म नहीं होता, बल्कि पर्यावरण बहाली और स्थायी बदलाव की शुरुआत होती है. PEKB खदान इसका शानदार उदाहरण है.' 

एक समय जहां यहां खनन कार्य चल रहा था, आज वही जगह घने हरे-भरे पेड़ों से ढकी हुई है. यह दिखाता है कि जिम्मेदार खनन और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं. अडाणी कंपनी के इस प्रयास से स्थानीय पर्यावरण को नई जीवन शक्ति मिल रही है. आसपास के इलाकों में भी हरियाली बढ़ रही है, जो वन्यजीवों और स्थानीय लोगों दोनों के लिए फायदेमंद है.