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11 अगस्त को आम जनता के लिए क्यों खोल दिया जाता है मुजफ्फरपुर जेल का दरवाजा, खुदीराम बोस से जुड़ा है इतिहास

11 अगस्त, वो दिन जब देश के सबसे युवा क्रांतिकारी खुदीराम बोस को फांसी की सजा दी गई थी. खुदीराम बोस पश्चिम बंगाल के मिदनापुर के रहने वाले थे. गोरे जज किंग्सफोर्ड को मारने के लिए उन्होंने मुजफ्फरपुर के कंपनीबाग में 30 अप्रैल 1908 को बम फेंका था जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था.

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11 अगस्त को आम जनता के लिए क्यों खोल दिया जाता है मुजफ्फरपुर जेल का दरवाजा, खुदीराम बोस से जुड़ा है इतिहास
Courtesy: social media

Bihar News: मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारा का गेट 11 अगस्त की सुबह आम लोगों के लिए खोल दिया गया. वक्त था अमर शहीद खुदीराम बोस को श्रद्धांजलि देने का. वही खुदीराम जिन्होंने देश की आजादी के लिए नन्ही सी उम्र में अंग्रेजों पर पहला बम फेंका था.

नम आंखों से दी गई खुदीराम बोस को श्रद्धांजलि

इस दौरान जिलाधिकारी सुब्रत सेन, एसएसपी राकेश कुमार समेत सभी आलाधिकारी जेल पहुंचे. सुबह 3 बजकर 50 मिनट पर परंपरा के अनुरूप अमर शहीद खुदीराम बोस को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी गई. इस दौरान पश्चिम बंगाल के मेदनापुर से आया खुदीराम बोस का परिवार भी मौजूद रहा. 

11 अगस्त को खोल दिए जाते हैं मुजफ्फरपुर जेल के दरवाजे

बता दें कि 11 अगस्त 1908 को खुदीराम बोस को मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारा में ही फांसी की सजा दी गई थी. इस अमर शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल 11 अगस्त को जेल के दरवाजे आम लोगों के लिए खोल दिए जाते हैं. जिस वक्त खुदीराम को फांसी हुई उस वक्त वह मात्र 18  साल के थे.

क्यों दी गई थी खुदीराम को फांसी
खुदीराम बोस पश्चिम बंगाल के मिदनापुर के रहने वाले थे. गोरे जज किंग्सफोर्ड को मारने के लिए उन्होंने मुजफ्फरपुर के कंपनीबाग में 30 अप्रैल 1908 को बम फेंका था. दुर्भाग्य से जब खुदीराम बोस ने बग्घी पर बम फेंका उस वक्त किंग्सफोर्ड बग्घी में नहीं था. बग्घी में दो यूरोपियन महिला बैठी हुई थीं. इस हमले में दोनों महिलाएं मारी गईं और खुदीराम को गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद खुदीराम पर मुकदमा चला और फिर उन्हें फांसी दे दी गई.   

किस बात से आहत थे खुदीराम
इस महान क्रांतिकारी की शहादत ने स्वतंत्रता संग्राम का रुख बदलकर रख दिया. दरअसल, खुदीराम बोस 1905 में हुए बंगाल विभाजन से आहत थे और उन्होंने इस विभाजन के विरोध में हुए आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था.