Bihar News: मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारा का गेट 11 अगस्त की सुबह आम लोगों के लिए खोल दिया गया. वक्त था अमर शहीद खुदीराम बोस को श्रद्धांजलि देने का. वही खुदीराम जिन्होंने देश की आजादी के लिए नन्ही सी उम्र में अंग्रेजों पर पहला बम फेंका था.
नम आंखों से दी गई खुदीराम बोस को श्रद्धांजलि
इस दौरान जिलाधिकारी सुब्रत सेन, एसएसपी राकेश कुमार समेत सभी आलाधिकारी जेल पहुंचे. सुबह 3 बजकर 50 मिनट पर परंपरा के अनुरूप अमर शहीद खुदीराम बोस को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी गई. इस दौरान पश्चिम बंगाल के मेदनापुर से आया खुदीराम बोस का परिवार भी मौजूद रहा.
#KhudiramBose #Muzaffarpur #CentralJail
— Imedia (@Imedia_comm) August 11, 2024
Khudiram Bose ko Aaj k din hi fansi di gayi thi...jail ke ander unko Maine v shraddhanjali di . pic.twitter.com/09fRdLvxT3
11 अगस्त को खोल दिए जाते हैं मुजफ्फरपुर जेल के दरवाजे
बता दें कि 11 अगस्त 1908 को खुदीराम बोस को मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारा में ही फांसी की सजा दी गई थी. इस अमर शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल 11 अगस्त को जेल के दरवाजे आम लोगों के लिए खोल दिए जाते हैं. जिस वक्त खुदीराम को फांसी हुई उस वक्त वह मात्र 18 साल के थे.
#OnThisDay
— John Oldman (@PrasunNagar) August 11, 2024
Khudiram Bose was hanged on 11 August 1908 at Muzaffarpur Jail at the age of 18.
He is one of the youngest to have laid down his life for India's independence.
The place where he was hanged was converted to a toilet, which continued its existence post independence. pic.twitter.com/BTtHTItqD1
क्यों दी गई थी खुदीराम को फांसी
खुदीराम बोस पश्चिम बंगाल के मिदनापुर के रहने वाले थे. गोरे जज किंग्सफोर्ड को मारने के लिए उन्होंने मुजफ्फरपुर के कंपनीबाग में 30 अप्रैल 1908 को बम फेंका था. दुर्भाग्य से जब खुदीराम बोस ने बग्घी पर बम फेंका उस वक्त किंग्सफोर्ड बग्घी में नहीं था. बग्घी में दो यूरोपियन महिला बैठी हुई थीं. इस हमले में दोनों महिलाएं मारी गईं और खुदीराम को गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद खुदीराम पर मुकदमा चला और फिर उन्हें फांसी दे दी गई.
#OnThisDay
— John Oldman (@PrasunNagar) August 11, 2023
Revolutionary Khudiram Bose, aged 18, was hanged at Muzaffarpur Jail on 11 August 1908.
Khudiram and his associate Prafulla Chaki were the main participants in the 'Muzaffarpur Bombings', in which they were accussed of trying to kill Judge Kingsford. pic.twitter.com/U40jYFcGIa
किस बात से आहत थे खुदीराम
इस महान क्रांतिकारी की शहादत ने स्वतंत्रता संग्राम का रुख बदलकर रख दिया. दरअसल, खुदीराम बोस 1905 में हुए बंगाल विभाजन से आहत थे और उन्होंने इस विभाजन के विरोध में हुए आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था.