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सीएम नीतीश के बुर्का विवाद पर उठे सवाल पर बीजेपी का पलटवार, अशोक गहलोत के पुराना वीडियो शेयर कर कही ये बात

नीतीश कुमार के बुर्का वाले वीडियो पर सुप्रिया श्रीनेत के बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है. राधिका खेड़ा ने अशोक गहलोत के पुराने वीडियो को शेयर करते हुए पलटवार किया.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
सीएम नीतीश के बुर्का विवाद पर उठे सवाल पर बीजेपी का पलटवार, अशोक गहलोत के पुराना वीडियो शेयर कर कही ये बात
Courtesy: @Radhika_Khera X account

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़ा बुर्का वाला वीडियो सामने आने के बाद सियासी बहस और तेज हो गई है. इस वीडियो को शेयर करते हुए सुप्रिया श्रीनेत ने मुख्यमंत्री के व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए हैं. सुप्रिया श्रीनेत ने लिखा कि बिहार में एक समारोह के दौरान पत्र वितरण के समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक लड़की का जबरन हिजाब खींच लिया. उन्होंने दावा किया कि स्थिति इतनी असहज हो गई कि सुरक्षाकर्मी को उस लड़की को पीछे खींचना पड़ा.

सुप्रिया श्रीनेत ने अपने पोस्ट में सवाल उठाया कि इतनी घटिया हरकत पर चारों तरफ सन्नाटा क्यों है. उन्होंने पूछा कि जब यह काम एक मुख्यमंत्री ने किया, तो फिर कोई आक्रोश क्यों नहीं दिखा. उन्होंने यह भी कहा कि टीवी चैनलों पर इस मुद्दे पर कोई डिबेट नहीं हो रही है. उनके अनुसार यह चुप्पी हैरान करने वाली है और इससे दोहरे मापदंड सामने आते हैं.

राधिका खेड़ा ने किया पलटवार

सुप्रिया श्रीनेत के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. उनके पोस्ट पर पलटवार करते हुए राधिका खेड़ा ने एक पुराना वीडियो शेयर किया, जिसमें राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा एक महिला का घूंघट उठाने का मामला सामने आया था. राधिका खेरगा ने सुप्रिया श्रीनेत से सवाल किया कि उस समय वह कहां थीं जब यह घटना हुई थी.

राधिका खेड़ा ने आगे क्या कहा?

राधिका खेरगा ने अपने बयान में कहा कि अशोक गहलोत के उस वीडियो पर न तो सुप्रिया श्रीनेत का कोई गुस्से भरा ट्वीट आया और न ही कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई सख्त प्रतिक्रिया दी गई. उन्होंने राहुल गांधी का भी जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त उनकी जुबान पर दही जम गया था और उंगलियों पर ताले लग गए थे. राधिका खेरगा ने यह भी पूछा कि क्या उस घटना के लिए कांग्रेस के हाई कमान ने पूरे हिंदू समाज से माफी मांगी थी.

उन्होंने आगे कहा कि अगर महिला अधिकारों की बात की जाती है, तो यह अधिकार सिर्फ एक समुदाय की महिलाओं तक सीमित क्यों माने जाते हैं. उनके अनुसार हिंदू महिलाओं के अधिकारों पर ऐसे मामलों में चुप्पी सवाल खड़े करती है.