देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET एक बार फिर विवादों में है. बिहार के लखीसराय में आयोजित री एग्जाम के दौरान सॉल्वर गैंग के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. पुलिस की कार्रवाई में अब तक 24 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें कई मेडिकल छात्र और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं. पुलिस के अनुसार गिरोह का खुलासा उस समय हुआ जब पीएमसीएच का थर्ड ईयर एमबीबीएस छात्र मयंक कश्यप कथित तौर पर बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी के रूप में परीक्षा केंद्र में पहुंच गया. जांच के दौरान उसकी गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं और उसे हिरासत में लिया गया. पूछताछ में मयंक ने कई अहम जानकारियां दीं, जिसके बाद पुलिस ने अलग अलग परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी शुरू कर दी. इसी कार्रवाई में पूरे नेटवर्क की परतें खुलती चली गईं.
जांच एजेंसियों का दावा है कि गिरोह असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा में बैठाकर परीक्षा पास कराने की साजिश चला रहा था. पुलिस को संदेह है कि इसके लिए फर्जी दस्तावेजों और पहचान प्रक्रिया में भी हेरफेर की गई. छापेमारी के दौरान कई ऐसे उम्मीदवार पकड़े गए जिनकी पहचान और परीक्षा रिकॉर्ड पर सवाल खड़े हुए हैं.
मामले की जांच में सामने आया है कि कई प्रतिष्ठित मेडिकल और नर्सिंग संस्थानों के छात्र इस नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं. पुलिस ने बीएचयू नर्सिंग की छात्रा पूनम कुमारी को दूसरे अभ्यर्थी के नाम पर परीक्षा देते हुए पकड़ा. इसके अलावा एम्स रायबरेली, दिल्ली के मेडिकल संस्थान और बिहार के नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े छात्रों के नाम भी सामने आए हैं. पुलिस इन सभी की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है.
इस मामले में परीक्षा प्रक्रिया संभाल रही बायोमेट्रिक कंपनी के 14 कर्मचारियों की गिरफ्तारी ने जांच को नया मोड़ दे दिया है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पहचान सत्यापन प्रक्रिया में कहीं अंदरूनी मिलीभगत तो नहीं थी. अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला केवल परीक्षा फर्जीवाड़े तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा. पुलिस के अनुसार गया के एक मेडिकल छात्र अर्पित राज को इस नेटवर्क का प्रमुख संचालक माना जा रहा है. अर्पित का नाम पहले भी नीट पेपर लीक मामले की जांच में सामने आ चुका है. अब पुलिस उसके नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है.