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बिहार की सीटों पर नहीं होने देंगे खेला, जेपी नड्डा से मिल कैसे खुश हुए चिराग पासवान, समझें NDA का शेयरिंग प्लान

NDA Seat Sharing In Bihar: आगामी लोकसभा चुनाव से पहले बिहार में एनडीए के बीच सीट शेयरिंग का फॉर्मूला अब करीब-करीब तय हो चुकी है. सूत्रों की मानें तो सीट शेयरिंग पर एनडीए में शामिल सभी दलों के बीच सहमति बन गई है और किसी भी वक्त आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है.

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बिहार की सीटों पर नहीं होने देंगे खेला, जेपी नड्डा से मिल कैसे खुश हुए चिराग पासवान, समझें NDA का शेयरिंग प्लान

NDA Seat Sharing In Bihar: लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बिहार में एनडीए में शामिल दलों के बीच सीट शेयरिंग का फॉर्मूला अब तक हो चुकी है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि बिहार में बीजेपी 20 से 22 सीटों पर अपना उम्मीदवार उतार सकती है. सीट शेयरिंग को लेकर बिहार में होने वाले आधिकारिक ऐलान से पहले चिराग पासवान ने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से दिल्ली में मुलाकात की है. चिराग पासवान और नड्डा के बीच इस मुलाकात के बाद अब खबर आ रही है बातचीत साकारात्मक रही है.  

सूत्रों की मानें तो एलजेपी को चार सीटें देने पर बात बनी है. इस चार सीटों पर चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति पारस को एडजस्ट किया जाएगा. इसके अलावा उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी की पार्टी को एक सीट देने पर सहमति बनी है. बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी और जेडीयू ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और जेडीयू दोनों ने 17-17 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. चुनाव के बाद नीतीश कुमार एनडीए से अलग हो गए थे.

NDA में नीतीश की वापसी के बाद खींचतान

सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के अनुसार एनडीए में नीतीश कुमार के आने से पहले तक सीट बंटवारे को लेकर बिहार में कोई खींचतान नहीं थी. सूत्रों की मानें तो एनडीए में नीतीश कुमार के आने के बाद सीट शेयरिंग का पूरा गणित प्रभावित हो गया है. वहीं दूसरी तरफ खबर यह भी सामने आ रही है कि चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति कुमार पारस दोनों हाजीपुर सीट के लिए अड़े हुए हैं.

हाजीपुर सीट ने बढ़ाई टेंशन

हाजीपुर सीट को लेकर चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति कुमार पारस की जिद अब बीजेपी के लिए सिरदर्द बन चुकी है. बता दें, 2019 में चिराग के चाच पशुपति कुमार पारस ने इस सीट से जीत दर्ज की थी. अब देखने वाली बात होगी की चाचा भतीजे की जिद के बीच पार्टी हाईकमान क्या फैसला लेती है.