भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की विशेष निगरानी में आ गया है. इसकी वजह है भारतीय नकली नोट तस्करी के मामलों में कई बार गिरफ्तार हो चुके यूनुस अंसारी की जमानत पर रिहाई. नेपाल के बारा जिले का रहने वाला अंसारी लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय नकली मुद्रा नेटवर्क से जुड़ा नाम माना जाता रहा है. उसकी रिहाई की जानकारी सामने आते ही सीमा क्षेत्र पर सक्रिय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों की नजर अब उसके संभावित संपर्कों और गतिविधियों पर टिकी हुई है.
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यूनुस अंसारी हाल ही में जमानत राशि जमा करने के बाद चुपचाप जेल से बाहर आ गया. इससे पहले वह एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी हिरासत में था. वर्ष 2025 में सजा पूरी होने के बाद जब उसकी रिहाई होने वाली थी, तब नेपाल पुलिस के केंद्रीय अनुसंधान ब्यूरो ने उसे दोबारा हिरासत में लिया था. बाद में अदालत द्वारा निर्धारित जमानत राशि जमा होने के बाद उसे रिहा कर दिया गया. कारागार प्रशासन ने भी उसकी रिहाई की पुष्टि की है. इस घटनाक्रम के बाद सीमा पार सक्रिय एजेंसियां उसके नेटवर्क की गतिविधियों को लेकर अधिक सतर्क हो गई हैं.
यूनुस अंसारी का नाम पिछले दो दशकों से नकली भारतीय मुद्रा से जुड़े मामलों में सामने आता रहा है. वर्ष 2009 में वह लाखों रुपये के नकली भारतीय नोटों के साथ पकड़ा गया था. इसके बाद 2010 में भी उसके खिलाफ इसी तरह का मामला दर्ज हुआ और उसे सजा सुनाई गई. वर्ष 2013 में भी वह नकली नोटों के साथ गिरफ्तार हुआ था. सबसे बड़ी कार्रवाई वर्ष 2019 में हुई, जब काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उसके पास से 7 करोड़ 67 लाख 94 हजार रुपये मूल्य के नकली भारतीय नोट बरामद किए गए थे. इसी मामले में उसे छह वर्ष की सजा मिली थी.
नेपाल की जांच एजेंसियों द्वारा की गई पड़ताल में अंसारी की आर्थिक गतिविधियों को लेकर भी कई जानकारियां सामने आईं. जांच में दावा किया गया कि नकली नोट कारोबार से जुड़े धन का उपयोग विभिन्न निवेशों में किया गया. अधिकारियों के अनुसार उसके बैंक खातों और परिवार से जुड़े खातों में बड़ी रकम जमा पाई गई. इसके अलावा उसके नाम पर भूमि होने की भी जानकारी सामने आई. जांच एजेंसियों का मानना है कि इन संपत्तियों के स्रोतों को समझने के लिए वित्तीय लेनदेन की गहन जांच की गई थी. इसी आधार पर उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी दर्ज किया गया.
यूनुस अंसारी की रिहाई के बाद भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को मजबूत किया गया है. खुफिया एजेंसियां उसके पुराने संपर्कों और संभावित गतिविधियों पर नजर रख रही हैं. नेपाल पुलिस के कुछ अधिकारियों का मानना है कि वह फिलहाल नेपाल में मौजूद नहीं हो सकता, हालांकि उसकी वर्तमान लोकेशन को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. इस बीच सीमा क्षेत्र में तैनात एजेंसियों को सतर्क रहने और सूचनाओं के आदान-प्रदान को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी ताकि सीमा पार अपराध से जुड़े नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखा जा सके.