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Bihar Chunav 2025: टिकट बंटवारे में 'पैसे वालों' को तरजीह, कांग्रेस में फूटे बगावत के सुर

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में टिकट बंटवारे को लेकर जबरदस्त असंतोष उभर आया है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि टिकट देने की प्रक्रिया में पैसे वालों को तरजीह दी गई और जमीनी कार्यकर्ताओं की वर्षों की मेहनत को नजरअंदाज कर दिया गया.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
Bihar Chunav 2025: टिकट बंटवारे में 'पैसे वालों' को तरजीह, कांग्रेस में फूटे बगावत के सुर
Courtesy: social media

पटना में शनिवार को कांग्रेस के स्टेट रिसर्च सेल प्रमुख आनंद माधव के नेतृत्व में कई नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना था कि बिहार कांग्रेस ने टिकट बंटवारे में सिद्धांतों की जगह आर्थिक ताकत को प्राथमिकता दी. 

माधव ने कहा, 'सालों से पार्टी के लिए मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को किनारे कर दिया गया, जबकि जिनके पास पैसा है, उन्हें टिकट मिल गया.'

‘एजेंटों के कब्जे में पार्टी’

आनंद माधव के साथ गजनंद शाही, छत्रपति तिवारी, नागेंद्र प्रसाद विकल, रंजन सिंह, बच्चू प्रसाद सिंह और बंटी चौधरी जैसे नेता मौजूद थे. इन सभी ने आरोप लगाया कि बिहार कांग्रेस अब कुछ नेताओं के 'निजी एजेंटों' के नियंत्रण में है. उनका कहना था कि सच्चे कांग्रेसियों को हाशिए पर धकेल दिया गया है और पार्टी की विचारधारा को ताक पर रख दिया गया है. नेताओं ने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी की जमीनी कार्यकर्ताओं को मजबूत करने की सोच को बिहार में पूरी तरह अनदेखा किया गया है.

'राहुल गांधी के भरोसे का गलत इस्तेमाल'

नाराज नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी ने हमेशा कहा कि टिकट योग्यता और जनता से जुड़ाव के आधार पर दिए जाएं, लेकिन बिहार में उलटा हो गया. कुछ नेताओं ने उनके भरोसे का फायदा उठाते हुए अपने नजदीकी लोगों को टिकट दिलाया. प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा गया कि अगर इस तरह के फैसले जारी रहे, तो पार्टी को चुनाव में नुकसान झेलना पड़ सकता है.

पार्टी नेतृत्व की चुप्पी बढ़ा रही सियासी गर्मी

इस विवाद पर बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम से संपर्क करने की कोशिश नाकाम रही. हालांकि सूत्रों का कहना है कि हाईकमान ने इस विवाद को गंभीरता से लिया है और टिकट बंटवारे की प्रक्रिया की समीक्षा के संकेत दिए हैं. कांग्रेस ने गुरुवार को अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी की थी, जिसमें 48 नाम शामिल थे. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी असंतोष को शांत करने के लिए क्या कदम उठाती है. बिहार विधानसभा की 243 सीटों पर दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को मतदान होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को होगी.