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India Daily

'जनता के 92 हजार करोड़ कहां गए?' CAG रिपोर्ट से बिहार विधानसभा में सियासी घमासान तय

कैग रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि बिहार सरकार 92,132 करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं कर सकी. विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है, जिससे विधानसभा में हंगामे के आसार हैं.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
'जनता के 92 हजार करोड़ कहां गए?' CAG रिपोर्ट से बिहार विधानसभा में सियासी घमासान तय
Courtesy: @BJP4Bihar

बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट को लेकर जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है. रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 31 मार्च 2025 तक राज्य सरकार 92,132 करोड़ रुपये के खर्च से जुड़े उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) जमा नहीं कर सकी है. इस खुलासे के बाद विपक्ष सरकार को वित्तीय जवाबदेही के मुद्दे पर घेरने की तैयारी में है. पिछले वर्ष भी इसी मुद्दे पर बड़ा विवाद हुआ था, जब लंबित राशि 70,877 करोड़ रुपये बताई गई थी.

क्या होता है उपयोगिता प्रमाण पत्र और क्यों है जरूरी?

सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के लिए जारी धनराशि के सही उपयोग की पुष्टि करने के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य होता है. बिहार कोषागार संहिता, 2011 के नियम 271 के अनुसार किसी भी विभाग को बजट आवंटन के 18 महीने के भीतर यह प्रमाण पत्र देना होता है. कैग रिपोर्ट के अनुसार राज्य के विभिन्न विभागों के 62,632 उपयोगिता प्रमाण पत्र अभी तक लंबित हैं. इनमें 2019-20 से पहले की 21,515 करोड़ रुपये की राशि भी शामिल है, जिससे लंबे समय से लंबित वित्तीय मामलों पर सवाल उठ रहे हैं.

इन विभागों में सबसे अधिक लंबित है हिसाब

रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र पंचायती राज विभाग के हैं. इस विभाग ने 32,383 करोड़ रुपये का हिसाब प्रस्तुत नहीं किया है. इसके बाद शिक्षा विभाग पर 19,097 करोड़ रुपये, नगर विकास एवं आवास विभाग पर 17,876 करोड़ रुपये, ग्रामीण विकास विभाग पर 6,418 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य विभाग पर 3,036 करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित हैं. इन आंकड़ों ने विभागीय वित्तीय निगरानी और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

कैग की चेतावनी और वित्त विभाग की चुप्पी

कैग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर जमा नहीं होने से सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस संबंध में वित्त विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन जनवरी 2026 तक कोई जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया. ऐसे में विपक्ष सरकार से जवाब मांगने की तैयारी कर रहा है, जबकि सरकार के सामने वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. विधानसभा के अंतिम दिन यह मुद्दा राजनीतिक बहस का प्रमुख केंद्र बनने की संभावना है.