बिहार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है. राज्य सरकार ने AI आधारित तकनीकों को प्रशासन, शिक्षा, शोध और कृषि से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं.
इसी दिशा में सूचना प्रावैधिकी विभाग ने सरवम डॉट AI और भारत GPT के साथ समझौता किया है. सरकार का मानना है कि इससे नागरिकों को तेज, पारदर्शी और आसान सरकारी सेवाएं मिलेंगी, जबकि युवाओं और किसानों के लिए भी नई संभावनाएं खुलेंगी.
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में हुए इस समझौते का उद्देश्य बिहार के लिए स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करना है. सरकार चाहती है कि हर नागरिक और सरकारी अधिकारी तक एआई तकनीक की आसान पहुंच हो. इसके साथ ही मजबूत डिजिटल ढांचा तैयार किया जाएगा, जिससे प्रशासनिक कार्य अधिक प्रभावी और नागरिक केंद्रित बन सकें.
सरकार का कहना है कि इस पहल के तहत बड़े स्तर पर एआई प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाए जाएंगे. इससे युवाओं को नई तकनीकों का ज्ञान मिलेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. मुख्यमंत्री ने इसे विकसित बिहार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक राज्य की प्रगति में अहम भूमिका निभाएगी.
इस साझेदारी के बाद सरकारी विभागों और शोधकर्ताओं को भारत में विकसित एआई मॉडल का उपयोग करने का अवसर मिलेगा. स्थानीय भाषाओं और बोलियों में तकनीकी समाधान तैयार करने में भी सुविधा होगी. इससे बिहार की जरूरतों के अनुसार शोध कार्य मजबूत होंगे और स्थानीय समस्याओं के समाधान खोजने में आसानी होगी.
दिल्ली में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने गूगल के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के उपयोग पर चर्चा की. इसमें फार्मर आईडी, बीज से बाजार तक डिजिटल सेवाएं और किसानों के लिए तकनीक आधारित समाधान प्रमुख विषय रहे. विभाग इन प्रस्तावों का अध्ययन कर आगे की रणनीति तैयार करेगा.
सरकार के अनुसार फार्मर आईडी किसानों का डिजिटल कृषि रिकॉर्ड बनेगी. इसमें उर्वरक, कीटनाशक, सब्सिडी, सरकारी योजनाओं और कृषि उपज की खरीद जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां एक ही मंच पर उपलब्ध होंगी. इससे किसानों को सरकारी सेवाओं का लाभ लेने में आसानी होगी और कृषि व्यवस्था पहले से अधिक पारदर्शी तथा व्यवस्थित बन सकेगी.