पटना: बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है. न्यायिक जांच आयोग ने घटना से जुड़े कई पुलिस अधिकारियों और जवानों को गवाही के लिए समन जारी किया है. दूसरी ओर पुलिस ने मुठभेड़ में इस्तेमाल किए गए कई सरकारी हथियार फोरेंसिक जांच के लिए जब्त किए हैं. आयोग का उद्देश्य घटना के हर पहलू की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों को सामने लाना है.
न्यायिक जांच आयोग ने जगदीशपुर के एसडीओ संजीत कुमार, तत्कालीन डीएसपी राजेश कुमार शर्मा और तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत करीब 15 पुलिस अधिकारियों और जवानों को आयोग के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है. सभी को अलग-अलग तिथियों पर अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया है.
आयोग की ओर से जारी समन में संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को 16 और 17 जुलाई को उपस्थित होने के लिए कहा गया है. आयोग घटना से जुड़े गवाहों के बयान, लगाए गए आरोपों और पुलिस पक्ष का विस्तृत परीक्षण करेगा. इसके लिए सिविल सेवा अधिनियम के तहत उन्हें उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है.
मामले की जांच कर रही पुलिस ने मुठभेड़ में मौजूद तत्कालीन डीएसपी के बॉडीगार्ड संजय कुमार, दारोगा हरिचंद्र कुमार और एएसआई रामाशंकर यादव की सरकारी सर्विस पिस्टल जब्त कर ली है. इन हथियारों को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाएगा ताकि तकनीकी जांच के जरिए महत्वपूर्ण तथ्य जुटाए जा सकें.
इससे पहले तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार की सरकारी पिस्टल, एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की सर्विस पिस्टल और भरत भूषण तिवारी के पास से बरामद हथियार भी जब्त किए जा चुके हैं. जांच एजेंसियां सभी हथियारों की रिपोर्ट का इंतजार कर रही हैं.
समन पाने वालों में शाहपुर थाने और एसटीएफ के कई अधिकारी, दारोगा, एएसआई, सिपाही और चालक हवलदार शामिल हैं. आयोग का प्रयास है कि सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जाए. इसके बाद उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी.