नई दिल्ली: टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है. अब यह मामला सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि इसमें राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव भी जुड़ गया है. हाल ही में बांग्लादेश द्वारा ICC के एक वरिष्ठ अधिकारी को वीजा न दिए जाने से यह विवाद और भी गंभीर हो गया है.
ICC और BCB के बीच चल रही अहम बातचीत उस समय मुश्किल में पड़ गई, जब ICC का दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बांग्लादेश नहीं पहुंच सका. सुरक्षा और भ्रष्टाचार विरोधी मामलों के प्रमुख एंड्रयू एफग्रेव 17 जनवरी को ढाका पहुंचे लेकिन उनके साथ आने वाले एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी, जो भारतीय नागरिक हैं, समय पर वीजा नहीं मिलने के कारण यात्रा नहीं कर सके.
इस पूरे विवाद की जड़ में सुरक्षा का मुद्दा है. बांग्लादेश सरकार और क्रिकेट बोर्ड का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक हालात में भारत में उनके खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ की सुरक्षा को लेकर खतरा हो सकता है. इसी कारण बांग्लादेश ने ICC से मांग की है कि उनके ग्रुप स्टेज के मुकाबले भारत के बजाय श्रीलंका में कराए जाएं. बीडीन्यूज 24 के मुताबिक एक आईसीसी अधिकारी को वीजा नहीं दिया गया, जिससे ये मामला अब तक साफ होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है.
ICC इस विवाद को सुलझाने के लिए इसे आखिरी प्रयास के तौर पर देख रही है. एंड्रयू एफग्रेव, जो पहले ब्रिटिश पुलिस अधिकारी रह चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय खेल सुरक्षा का लंबा अनुभव रखते हैं, बांग्लादेशी अधिकारियों के सामने एक विस्तृत सुरक्षा योजना पेश करने वाले हैं. ICC का मानना है कि इस योजना से बांग्लादेश को भरोसा दिलाया जा सकेगा कि भारत में मैचों के दौरान खिलाड़ियों को पूरी सुरक्षा मिलेगी.
टी20 वर्ल्ड कप शुरू होने में अब बहुत कम समय बचा है. ऐसे में ICC और बांग्लादेश दोनों पर दबाव बढ़ता जा रहा है. अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो इसका असर पूरे टूर्नामेंट पर पड़ सकता है. क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह चिंता का विषय है कि कहीं टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही बड़ा संकट खड़ा न हो जाए.
अब इस पूरे मामले की जिम्मेदारी काफी हद तक एंड्रयू एफग्रेव के कंधों पर है. अगर वह बांग्लादेश को मूल कार्यक्रम के अनुसार खेलने के लिए राजी नहीं कर पाए, तो टी20 वर्ल्ड कप 2026 का भविष्य खतरे में पड़ सकता है. ऐसे में सभी की निगाहें आने वाले दिनों की बातचीत पर टिकी हुई हैं.