ICC मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 चरण की शुरुआत ही बारिश की भेंट चढ़ गई. कोलंबो में पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच होने वाला मुकाबला बिना एक भी गेंद डाले रद्द करना पड़ा. श्रीलंका में ग्रुप-2 के सभी मैच होने हैं और मौसम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर सभी मुकाबले बारिश में धुल जाएं तो सेमीफाइनल की तस्वीर कैसे तय होगी. आईसीसी के नियम इस असामान्य स्थिति के लिए स्पष्ट प्रावधान रखते हैं.
ग्रुप-2 के बाकी मुकाबलों पर भी बारिश का खतरा मंडरा रहा है. यदि किसी ग्रुप के सभी मैच रद्द हो जाते हैं तो चारों टीमों के अंक बराबर रहेंगे. ऐसी स्थिति में टूर्नामेंट को आगे बढ़ाने के लिए टाई-ब्रेकर नियम लागू किए जाते हैं. यह नियम सुनिश्चित करते हैं कि प्रतियोगिता का परिणाम तय हो सके, भले ही मैदान पर खेल न हो पाए.
आईसीसी की प्लेइंग कंडीशंस के अनुसार पहले जीत की संख्या देखी जाती है. इसके बाद नेट रन रेट, फिर हेड-टू-हेड परिणाम को महत्व दिया जाता है. अगर ये सभी मानदंड बराबर रहें, तो टूर्नामेंट से पहले जारी टी20आई रैंकिंग अंतिम आधार बनती है. आईसीसी ने स्पष्ट किया है कि 6 फरवरी 2026 तक की रैंकिंग को ही मान्य माना जाएगा.
यदि ग्रुप-2 के सभी मैच धुल जाते हैं तो इंग्लैंड (रैंक 3) और न्यूजीलैंड (रैंक 4) सेमीफाइनल में पहुंच सकते हैं. पाकिस्तान (रैंक 6) और श्रीलंका (रैंक 8) बाहर हो जाएंगे. वहीं ग्रुप-1 में ऐसा होने पर भारत (रैंक 1) और दक्षिण अफ्रीका (रैंक 5) को बढ़त मिलेगी. हालांकि ग्रुप-1 के मुकाबले भारत में हैं, जहां बारिश की संभावना बेहद कम बताई जा रही है.
अगर सुपर-8 के सभी 12 मैच रद्द होते हैं तो प्रसारण भागीदार जियोस्टार को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. अनुमान है कि लगभग 1,800 करोड़ रुपये के विज्ञापन प्रभावित हो सकते हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि सभी मैचों का धुलना लगभग असंभव है, लेकिन नियम किसी भी आपात स्थिति में टूर्नामेंट को आगे बढ़ाने का रास्ता देते हैं.