जरा सोचिए एक पिता जो अपने बेटे को क्रिकेट की पिच पर चौके-छक्के लगाते देखता है, उसे टीम इंडिया का भविष्य मानता है और फिर एक दिन वही बेटा कहता है कि वह अंदर से एक लड़की है. यह किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर और बैटिंग कोच रहे संजय बांगर और उनके बच्चे की असली कहानी है. इस मुश्किल, लेकिन खूबसूरत सफर में उनके पिता संजय बांगर चट्टान की तरह उनके साथ खड़े रहे
क्रिकेट की पिच पर मुंबई और पुडुचेरी के लिए अंडर-19 खेल चुके आर्यन बांगर अब आधिकारिक तौर पर अनाया बांगर बन चुकी हैं. अनाया ने थाईलैंड में अपनी जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कर ली है, लेकिन इस मेडिकल प्रक्रिया से कहीं ज़्यादा बड़ी और रुला देने वाली कहानी उस स्वीकार्यता की है, जो एक पिता ने अपनी बेटी को दी है.
अनाया ने इंस्टाग्राम पर थाईलैंड के अस्पताल से एक बेहद भावुक तस्वीर शेयर की है. बेड पर अनाया हैं और उनके पास खड़े हैं उनके पिता संजय बांगर. अनाया ने जो लिखा, वह सीधे दिल पर लगता है. उन्होंने लिखा, "मेरी ज़िंदगी के सबसे बड़े पलों में मेरे पिता का मेरे साथ होना, मेरे लिए पूरी दुनिया है. ऐसा नहीं है कि उनका यह साथ मुझे रातों-रात मिल गया, लेकिन जब मिला, तो वह बेहद सच्चा, बिना किसी शर्त के और अटूट था." अनाया की ये लाइनें बताती हैं कि आर्यन से अनाया बनने का यह सफर परिवार के लिए कितना उथल-पुथल भरा रहा होगा.
अनाया एक बेहतरीन क्रिकेटर बनना चाहती थी, लेकिन जब 2023 में उन्होंने हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) शुरू की, तो शरीर में हो रहे बदलावों के कारण क्रिकेट खेलना नामुमकिन हो गया. खेल के मैदान पर उन्हें तानों और उत्पीड़न का भी सामना करना पड़ा.
अनाया ने अपनी असली पहचान नहीं छुपाई. आज जब समाज में ऐसे मुद्दों पर लोग बात करने से कतराते हैं, संजय बांगर का अपनी बेटी का हाथ थामकर पूरी दुनिया के सामने खड़े होना, एक बहुत बड़ा संदेश है. प्यार को वक्त लगता है, लेकिन जब वह मिलता है, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है.