वैसे तो पाकिस्तान अपनी किसी न किसी हरकत के लिए चर्चा में बना ही रहता है. अब पाकिस्तान क्रिकेट टीम से जुड़े लगभग दो दशक पुराने डोपिंग विवाद ने एक बार फिर सुर्खियां बटोर ली हैं. पूर्व गृह मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि ने एक पॉडकास्ट में दावा किया कि साल 2006 के दौरान भारत आए कुछ पाकिस्तानी खिलाड़ियों के पास ड्रग्स थे. उनका यह बयान सामने आने के बाद शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ से जुड़ा पुराना मामला फिर चर्चा में आ गया. इस घटनाक्रम ने क्रिकेट जगत में नई बहस को जन्म दे दिया है.
आरवीएस मणि ने एक पॉडकास्ट में दावा किया कि साल 2006 में भारत आए पाकिस्तानी खिलाड़ियों से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया था. उनके अनुसार पाकिस्तान के दिग्गज शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ सहित कुछ खिलाड़ियों ने पाकिस्तान के तत्कालीन उच्चायुक्त के सामने ड्रग्स से जुड़ी बात स्वीकार की थी. इसके बाद दोनों खिलाड़ियों को वापस भेज दिया गया था. इस बयान के बाद पुराने विवाद पर फिर चर्चा तेज हो गई.
अक्टूबर 2006 में भारत में चैंपियंस ट्रॉफी खेली जा रही थी. उसी दौरान पाकिस्तान क्रिकेट टीम लगातार विवादों में घिरी हुई थी. टूर्नामेंट शुरू होने से ठीक पहले शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ डोप टेस्ट में प्रतिबंधित पदार्थ के लिए पॉजिटिव पाए गए. इसके बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने दोनों खिलाड़ियों को तत्काल प्रभाव से टीम से बाहर कर पाकिस्तान लौटाने का फैसला लिया.
शोएब अख्तर ने उस समय कहा था कि उन्होंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया था और वह एक हकीम की दवा का सेवन कर रहे थे. हालांकि जांच समिति के सामने वह अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सके. जिस कारण दोनों खिलाड़ियों के खिलाफ एक्शन लिया गया था.
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने मामले की जांच पूरी होने तक दोनों खिलाड़ियों को निलंबित कर दिया. बाद में तीन सदस्यीय डोपिंग ट्रिब्यूनल ने शोएब अख्तर पर दो साल और मोहम्मद आसिफ पर एक साल का प्रतिबंध लगाया था.