नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज केएल राहुल इन दिनों सिर्फ अपने प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि अपने भविष्य को लेकर भी चर्चा में हैं. पहली बार राहुल ने संन्यास जैसे संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर बात की है. केविन पीटरसन के यूट्यूब चैनल पर दिए इंटरव्यू में उन्होंने चोटों, मानसिक थकान और निजी जीवन में आए बदलावों का जिक्र किया. उनके बयान ने फैंस को चौंकाया है, क्योंकि राहुल अभी भी टीम के अहम खिलाड़ियों में गिने जाते हैं.
केएल राहुल ने केविन पीटरसन के साथ बातचीत में स्वीकार किया कि उनके मन में रिटायरमेंट का विचार आया है. उन्होंने कहा कि वह इस विषय से डरते नहीं हैं. राहुल के अनुसार, अगर खिलाड़ी खुद के प्रति ईमानदार हो, तो उसे समझ आ जाता है कि कब रुकना है. उन्होंने साफ कहा कि वह अपनी इंटरनेशनल पारी को जबरदस्ती लंबा नहीं खींचना चाहते.
33 साल के राहुल ने बताया कि लगातार चोटिल होना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती रही है. बार-बार मैदान से बाहर होना और फिर वापसी के लिए लंबी रिकवरी प्रक्रिया से गुजरना मानसिक रूप से थका देता है. उन्होंने कहा कि शरीर के साथ-साथ दिमाग भी जवाब देने लगता है. कई बार ऐसा लगता है कि आपने बहुत कुछ झेल लिया है और अब रुक जाना ही बेहतर होगा.
राहुल ने यह भी साझा किया कि पिता बनने के बाद उनका नजरिया काफी बदल गया है. उन्होंने कहा कि क्रिकेट हमेशा रहेगा, लेकिन जीवन में इससे कहीं ज्यादा अहम चीजें भी होती हैं. परिवार और जिम्मेदारियों का एहसास अब पहले से ज्यादा गहरा हो गया है. उन्होंने माना कि अब उनकी प्राथमिकताएं अलग हैं और फैसले भी उसी हिसाब से सोच-समझकर लेने पड़ते हैं.
हालांकि राहुल ने यह साफ कर दिया कि फिलहाल उनका संन्यास लेने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने कहा कि वह अभी कुछ समय तक खेलना जारी रखेंगे. इस वक्त उनका पूरा ध्यान घरेलू क्रिकेट पर है. राहुल ने बताया कि वह कर्नाटक के लिए रणजी ट्रॉफी खेलने पर फोकस कर रहे हैं. उनका मानना है कि मैदान पर उतरकर खेल का आनंद लेना अभी भी उनके लिए जरूरी है.
केएल राहुल के बयान के बाद क्रिकेट फैंस भावुक नजर आए. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनके साहसिक और ईमानदार विचारों की तारीफ की. विशेषज्ञों का कहना है कि आज के दौर में खिलाड़ी मानसिक स्वास्थ्य और निजी जीवन को लेकर खुलकर बात कर रहे हैं, जो सकारात्मक बदलाव है. राहुल का यह बयान बताता है कि आधुनिक क्रिकेट में सिर्फ रन और रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि इंसानी पहलू भी उतना ही अहम है.