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वॉशरूम में रोती हूं... स्मृति मंधाना ने पहली बार खोला दिल, मैदान की मुस्कान के पीछे छिपा दर्द आया सामने

स्मृति मंधाना ने पॉडकास्ट में अपनी भावनाओं और क्रिकेट की हार से जुड़े दर्द पर खुलकर बात की.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
वॉशरूम में रोती हूं... स्मृति मंधाना ने पहली बार खोला दिल, मैदान की मुस्कान के पीछे छिपा दर्द आया सामने
Courtesy: X

भारतीय महिला क्रिकेट की स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना मैदान पर अपनी मुस्कान और शानदार बल्लेबाजी के लिए जानी जाती हैं. अब उन्होंने अपनी निजी भावनाओं से जुड़ा एक अलग पहलू सामने रखा है. राज शमानी के पॉडकास्ट में स्मृति ने बताया कि वह दुख को लंबे समय तक खुद पर हावी नहीं होने देतीं.

राज शमानी के पॉडकास्ट में छलका दर्द

राज शमानी के पॉडकास्ट ‘Figuring Out’ में स्मृति से जब रोने और भावनाओं को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वह खुद को उदासी से जोड़कर नहीं देखतीं. उनका स्वभाव किसी बात को लंबे समय तक सोचते रहने वाला नहीं है. आसपास किसी को भावुक देखकर भी वह अक्सर व्यावहारिक रहती हैं और कोशिश करती हैं कि दुख में ज्यादा देर न फंसे. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि उनकी आंखों में आंसू नहीं आते. स्मृति ने बताया कि वह कभी-कभी वॉशरूम या शॉवर में अकेले रो लेती हैं. कुछ बेहद करीबी लोगों के सामने भी वह अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर कर पाती हैं.

असल जिंदगी से ज्यादा फिल्मों पर निकलते हैं आंसू

स्मृति ने यह भी बताया कि असल जिंदगी की घटनाओं के मुकाबले फिल्मों का उन पर ज्यादा असर होता है. उनसे पूछा गया कि वह आखिरी बार कब रोई थीं, तो उन्होंने ‘मुसाफिर कैफे’ का जिक्र किया. फिल्म देखते समय वह भावुक हो गई थीं और उनकी आंखों से आंसू निकल आए थे. स्मृति के मुताबिक, वह अपनी भावनाओं को लेकर ज्यादा देर तक परेशान नहीं रहतीं. उनके लिए किसी दुख से बाहर निकलना ज्यादा जरूरी है. यही वजह है कि मैदान पर हार के बाद भी वह खुद को संभालकर आगे बढ़ने की कोशिश करती हैं.

आज भी दिल में कुछ मैचों का दर्द

क्रिकेट की हार की बात करते हुए स्मृति ने माना कि कुछ मुकाबलों का असर उन पर गहरा रहा है. उन्होंने 2024 के दुबई टी20 वर्ल्ड कप को खास तौर पर दर्दनाक बताया. इसके अलावा 2026 टी20 वर्ल्ड कप में भारत के सेमीफाइनल तक नहीं पहुंचने से भी उन्हें निराशा हुई. हालांकि, स्मृति ने यह साफ किया कि हर हार के बाद रोना जरूरी नहीं होता. कई बार मैच के बाद आंखों में आंसू नहीं आते लेकिन अंदर से मन जरूर भारी रहता है.