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India Daily

पश्चिम एशिया में बढ़ा संघर्ष तो 110 डॉलर के करीब पहुंचे कच्चे तेल के दाम, होर्मुज को लेकर बातचीत टली

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज वार्ता टलने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. ब्रेंट 109 डॉलर के करीब पहुंच गया, जिससे भारत के आयात बिल और महंगाई की चिंता बढ़ी.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
पश्चिम एशिया में बढ़ा संघर्ष तो 110 डॉलर के करीब पहुंचे कच्चे तेल के दाम, होर्मुज को लेकर बातचीत टली
Courtesy: pinterest

पश्चिम एशिया में संघर्ष गहराने का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखने लगा है. ईरान और खाड़ी देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बातचीत टलने तथा हूती हमलों से आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ी है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 109 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि WTI भी तेजी से चढ़ा.

होर्मुज वार्ता टली, तेल कीमतों में आया उछाल

ईरान और पश्चिम एशिया के दूसरे देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में संचालन को लेकर होने वाली बातचीत कुछ क्षेत्रीय देशों के अनुरोध पर टाल दी गई. इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और बढ़ गई. सोमवार शाम करीब 6.40 बजे नवंबर डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 4.20 प्रतिशत बढ़कर 109 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. वहीं अक्टूबर WTI 4.42 प्रतिशत चढ़कर 104.47 डॉलर प्रति बैरल रहा.

हूती हमलों ने बढ़ाई सप्लाई की चिंता

तेल बाजार पर दबाव बढ़ने की एक बड़ी वजह यमन के हूती विद्रोहियों की गतिविधियां भी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों ने सऊदी अरब के किंग खालिद एयर बेस पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया. इससे लाल सागर क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है. बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है और इसके जरिए दुनिया के करीब 12 प्रतिशत व्यापार तथा लगभग 11 प्रतिशत समुद्री तेल कारोबार का आवागमन होता है.

भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है मुश्किल

पश्चिम एशिया में लंबे समय तक तनाव रहने से भारत की चिंता बढ़ सकती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत के करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात करता है. बैंक ऑफ बड़ौदा के अनुमान के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत में लगातार 1 डॉलर की बढ़ोतरी भारत के सालाना आयात बिल को करीब 18,000 करोड़ रुपये बढ़ा सकती है. अप्रैल से जुलाई के बीच भारत का कच्चे तेल का आयात बिल 63.37 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की तुलना में 56 प्रतिशत अधिक है.

महंगाई पर भी पड़ सकता है असर

महंगे कच्चे तेल का असर केवल आयात बिल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश में महंगाई और सरकारी वित्त पर भी दबाव बढ़ सकता है. अगस्त में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 प्रतिशत के 20 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई, जबकि थोक महंगाई 9.92 प्रतिशत रही. S&P Global Energy के अनुसार, पश्चिम एशिया में तेल उत्पादन के जल्द युद्ध-पूर्व स्तर पर लौटने की संभावना कम है. ऐसे में 2027 तक सप्लाई जोखिम बने रह सकते हैं और ब्रेंट की कीमतें 2026 के बाकी हिस्से में करीब 90 डॉलर या उससे ऊपर रह सकती हैं.