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सचिन तेंदुलकर को हटाने की योजना बना रही थी BCCI? संदीप पाटिल ने किया विस्फोटक खुलासा

संदीप पाटिल ने बताया कि उन्होंने सचिन से उनके आगे के क्रिकेट करियर को लेकर सवाल किया था. इस पर सचिन ने उनसे पूछा कि ऐसा सवाल क्यों पूछा जा रहा है. तब उन्हें बताया गया कि चयनकर्ता उनके रिप्लेसमेंट के बारे में सोच रहे हैं.

Anuj
Edited By: Anuj
सचिन तेंदुलकर को हटाने की योजना बना रही थी BCCI? संदीप पाटिल ने किया विस्फोटक खुलासा

नई दिल्ली: विश्व क्रिकेट के महान बल्लेबाजों में गिने जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने साल 2013 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा था. अपने लंबे करियर में उन्होंने कई रिकॉर्ड बनाए. आज भी टेस्ट और वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में शीर्ष पर काबिज हैं. हालांकि, उनके करियर के अंतिम दौर में एक ऐसा समय भी आया जब उनके भविष्य को लेकर चयनकर्ताओं के बीच चर्चा शुरू हो गई थी.

भारत के पूर्व मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल ने हाल ही में एक इंटरव्यू में इस बारे में बड़ा खुलासा किया. उन्होंने बताया कि साल 2012 में जब सचिन का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं था, तब चयन समिति उनके विकल्प को लेकर विचार कर रही थी. यह बात जब सचिन को पता चली तो वह काफी हैरान रह गए थे.

संदीप पाटिल ने किया खुलासा

पाटिल ने बताया कि उन्होंने सचिन से उनके आगे के क्रिकेट करियर को लेकर सवाल किया था. इस पर सचिन ने उनसे पूछा कि ऐसा सवाल क्यों पूछा जा रहा है. तब उन्हें बताया गया कि चयनकर्ता उनके रिप्लेसमेंट के बारे में सोच रहे हैं. यह सुनकर सचिन को काफी आश्चर्य हुआ. बाद में उन्होंने फोन करके फिर पूछा कि क्या यह बात सच में कही जा रही है, जिस पर पाटिल ने उन्हें हां में जवाब दिया.

'उनके फैसले का सम्मान किया'

पूर्व चयनकर्ता ने यह भी कहा कि चयन समिति के पास किसी खिलाड़ी को जबरन संन्यास लेने के लिए कहने का अधिकार नहीं होता. चयनकर्ता केवल खिलाड़ी से उसके भविष्य की योजना के बारे में पूछ सकते हैं. जब सचिन से यह पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा कि वह अभी खेलना जारी रखना चाहते हैं, और चयन समिति ने उनके फैसले का सम्मान किया.

सुनहरे युग का अंत

दरअसल, 2011 में ICC वनडे विश्व कप जीतने के बाद सचिन का प्रदर्शन पहले जैसा नहीं रहा था. साल 2012 उनके लिए खासा चुनौतीपूर्ण साबित हुआ. उस वर्ष उन्होंने 9 टेस्ट मैचों में लगभग 23.80 की औसत से रन बनाए, जबकि 10 वनडे मैचों में उनका औसत करीब 31.50 रहा. इस दौरान उनके बल्ले से एक भी शतक नहीं निकला. बताया जाता है कि बाद में जब सचिन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया, तो उन्होंने इसकी जानकारी चयन समिति को भी दी थी. उनके संन्यास के साथ ही क्रिकेट जगत के एक सुनहरे युग का अंत माना गया.