भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अभी अगले साल के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की घोषणा नहीं की है, लेकिन उससे पहले खिलाड़ियों के लिए नियमों में बदलाव की तैयारी चल रही है. बोर्ड अब खिलाड़ियों की उपलब्धता को कॉन्ट्रैक्ट तय करने का महत्वपूर्ण आधार बनाने पर विचार कर रहा है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पूरे सीजन में टीम इंडिया के लिए उपलब्ध रहने वाले खिलाड़ियों और उनके द्वारा खेले गए मुकाबलों का आकलन किया जाएगा. इसी आधार पर उन्हें कॉन्ट्रैक्ट की अलग-अलग श्रेणियों में जगह मिल सकती है.
एक विश्वसनीय सूत्र ने बताया कि खिलाड़ियों की उपलब्धता को लेकर अभी चर्चा जारी है. बोर्ड यह तय करने की प्रक्रिया में है कि केंद्रीय अनुबंध हासिल करने के लिए किसी खिलाड़ी को एक सीजन में कम से कम कितने मैच खेलने जरूरी होंगे. हालांकि यह प्रस्ताव अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है. लागू करने से पहले इसके सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा और फिर अंतिम फैसला लिया जाएगा.
अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो लंबे समय तक चोट के कारण टीम से बाहर रहने वाले खिलाड़ियों को नुकसान हो सकता है. ऐसे खिलाड़ी पूरे सीजन में पर्याप्त मैच नहीं खेल पाते हैं, भले ही वह टीम के अहम सदस्य क्यों न हों. नए नियम के तहत उनकी उपलब्धता कम रहने पर उन्हें ऊंची कॉन्ट्रैक्ट कैटेगरी से बाहर किया जा सकता है. यानी सिर्फ टीम में शामिल होना नहीं, बल्कि मैदान पर उपलब्ध रहना भी अहम होगा.
BCCI ने पिछले साल A+ कैटेगरी को खत्म कर दिया था. फिलहाल खिलाड़ियों के लिए ग्रेड A, ग्रेड B और ग्रेड C की तीन श्रेणियां हैं. ग्रेड A में शुभमन गिल, जसप्रीत बुमराह और रवींद्र जडेजा शामिल हैं. इस श्रेणी के खिलाड़ियों को सालाना 8 करोड़ रुपये मिलते हैं. ग्रेड B के लिए 3 करोड़ और ग्रेड C के खिलाड़ियों को 1 करोड़ रुपये सालाना दिए जाते हैं.
बोर्ड का नया विचार लागू हुआ तो सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में खिलाड़ियों की उपलब्धता का महत्व पहले से ज्यादा बढ़ जाएगा. पूरे सीजन में कितने मुकाबलों के लिए खिलाड़ी उपलब्ध रहा और उसने कितने मैच खेले, इसका रिकॉर्ड कॉन्ट्रैक्ट तय करने में भूमिका निभा सकता है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि न्यूनतम मैचों की संख्या कितनी होगी. BCCI की चर्चा पूरी होने और प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद ही तस्वीर साफ होगी.