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महादेव बेटिंग केस के सरगना सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाया गया

चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक अवैध सट्टेबाजी का प्रमोटर है. उसके प्रत्यर्पण को देश के सबसे बड़े कथित सट्टेबाजी नेटवर्क में से एक की जांच में बड़ा कदम माना जा रहा है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
महादेव बेटिंग केस के सरगना सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाया गया
Courtesy: ANI

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने महादेव बेटिंग केस के सरगना सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित किया है. चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक अवैध सट्टेबाजी का प्रमोटर है. उसके प्रत्यर्पण को देश के सबसे बड़े कथित सट्टेबाजी नेटवर्क में से एक की जांच में बड़ा कदम माना जा रहा है.

सीबीआई की टीम ने ओमान का दौरा किया और चंद्रशेखर को पकड़कर भारत लाई. एजेंसी को ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उसका मेडिकल चेकअप किया जाएगा और फिर रायपुर ले जाया जाएगा. उसे सोमवार को रायपुर में सीबीआई स्पेशल कोर्ट में पेश किया जाएगा.

दो केस में वॉन्टेड है चंद्राकर 

बता दें कि चंद्राकर सीबीआई के दो केस में वॉन्टेड है, जिनकी चार्जशीट पहले ही फाइल हो चुकी है. वह एक अलग एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) केस में भी आरोपी है, जिसमें प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट फाइल हो गई है. महादेव बेटिंग केस के सरगना सौरभ चंद्राकर को CBI ने ओमान से प्रत्यर्पित किया.

ओमान का जताया आभार

सीबीआई के अनुसार, चंद्राकर को रॉयल ओमान पुलिस ने उसके खिलाफ जारी इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर ढूंढकर हिरासत में लिया था. सीबीआई और ईडी ने उसके खिलाफ जुटाए गए सबूतों के साथ ओमान को औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध भेजे थे. इस प्रक्रिया को ओमान के सक्षम प्रशासन, इंटरपोल की नेशनल सेंट्रल ब्यूरो  और भारत सरकार की विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से चलाई गई.

प्रत्यर्पण की अनुमति मिलने के बाद सीबीआई की एक टीम मस्कट पहुंची और चंद्राकर को भारत लेकर आई. इस सहयोग के लिए सीबीआई ने ओमान की सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का धन्यवाद दिया है. जांच एजेंसी ने कहा कि यह दोनों देशों के घनिष्ठ संबंधों और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने की उनकी साझी प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

क्या है महादेव बेटिंग ऐप मामला

सीबीआई ने छत्तीसगढ़ सरकार के आवेदन पर महादेव ऑनलाइन बुक केस की जांच को अपने हाथों में लिया था. जांच में पाया गया कि यह प्लेटफॉर्म कथित रूप से भारत के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट में से एक था और यह देश के बाहर से संचालित किया जा रहा था. यह भारत में फैली अपनी शाखाओं और फ्रेंचाइजी पैनल नेटवर्क के माध्यम से क्रिकेट, फुटबॉल, कार्ड गेम्स और अन्य कार्यक्रमों पर स्ट्टेबाजी करने की सुविधा देता था. इन सभी आउटलेट ने कथित तौर पर यूजर्स का पंजीकरण किया और सट्टेबाजी की रकम इकट्ठा की. प्राप्त रकम को कई गुप्त बैंक खातों और लेन-देन में हेरफेर कर हवाला चैनलों के माध्यम से विदेश भेजा गया. जांच में यह भी सामने आया कि सट्टेबाजी के लिए जुटाई गई कुछ रकम सरकारी नौकरशाहों को भी खिलाई गई ताकि यह गिरोह बिना किसी दखल के अपना काम कर सके.