नई दिल्ली: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में रिश्तों को समझना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है. खासतौर पर तब, जब सामने वाला कम बोलता हो और अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर न करता हो. अक्सर ऐसे लोगों को हम इंट्रोवर्ट कहकर समझ लेते हैं.
लेकिन मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि हर खामोश इंसान संकोची नहीं होता. कई बार यह खामोशी भावनात्मक दूरी का संकेत भी हो सकती है, जिसे समय रहते पहचानना जरूरी है.
कई बार Emotionally Unavailable व्यक्ति बातचीत को सतही स्तर तक ही सीमित रखता है. वह रोजमर्रा की बातों पर तो बात कर लेता है, लेकिन भावनाओं, भविष्य या रिश्ते की गहराई पर चर्चा से बचता है. इंट्रोवर्ट लोग समय लेकर खुलते हैं, लेकिन खुलते जरूर हैं. इसके उलट भावनात्मक रूप से अनुपलब्ध व्यक्ति जानबूझकर गहरी बातचीत से दूरी बना लेता है.
ऐसे लोगों में कमिटमेंट से बचने की प्रवृत्ति साफ नजर आती है. रिश्ते को नाम देने, भविष्य की प्लानिंग करने या जिम्मेदारी लेने की बात आते ही वे विषय बदल देते हैं.
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