अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को, कैसे हुई इसकी शुरुआत और क्या है इस साल की थीम? यहां जानें
हर साल 8 मार्च के दिन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. आइए इसके इतिहास और इस साल की थीम के बारे में जानते हैं.
नई दिल्ली: हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस बड़े उत्साह से मनाया जाता है. यह दिन सिर्फ महिलाओं की उपलब्धियों को सेलिब्रेट करने का नहीं, बल्कि जेंडर इक्वालिटी के लिए जागरूकता फैलाने और बदलाव की मांग करने का भी मौका है. साल 2026 में यह रविवार को पड़ रहा है, जब लोग अपने घरों, ऑफिसों और सोशल मीडिया पर महिलाओं को बधाई देंगे.
इस बार की थीम
'Give To Gain' खास मायने रखती है, क्योंकि यह कहती है कि जब हम महिलाओं को समय, संसाधन, शिक्षा या मेंटरशिप देंगे, तो समाज पूरा मजबूत बनेगा. इस थीम का मतलब है कि देने से हम खुद भी लाभान्वित होते हैं. कोई दान दे, ज्ञान बांटे या अवसर प्रदान करे, तो महिलाओं के लिए रास्ते खुलते हैं और सबके लिए बेहतर दुनिया बनती है. यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक सोच है जो सहयोग और उदारता पर जोर देती है.
'Give To Gain' का गहरा संदेश
इस थीम के तहत जोर दिया जा रहा है कि जेंडर इक्वालिटी को बढ़ावा देने के लिए हर व्यक्ति, संगठन और समुदाय को उदारता से योगदान देना चाहिए. दान, मेंटरिंग, ट्रेनिंग या सिर्फ समय देना-ये सब छोटे कदम महिलाओं की प्रगति को तेज करते हैं. जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं, तो परिवार, अर्थव्यवस्था और समाज मजबूत होता है. यह रिसिप्रोकल फायदा है, जहां देने वाला भी पाता है.
महिला दिवस की जड़ें
1908 के विरोध मेंसब कुछ 1908 से शुरू हुआ, जब न्यूयॉर्क में 15,000 से ज्यादा महिलाओं ने बेहतर वेतन, कम काम के घंटे और वोटिंग राइट के लिए सड़कों पर उतर आईं. यह ऐतिहासिक प्रदर्शन महिला अधिकारों की लड़ाई की नींव बना. दो साल बाद 1910 में क्लारा जेटकिन ने कोपेनहेगन सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा.
1911 से शुरू हुआ वैश्विक उत्सव
1911 में पहली बार ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में महिला दिवस मनाया गया. यह दिन महिलाओं की एकजुटता का प्रतीक बना. धीरे-धीरे यह आंदोलन दुनिया भर में फैला और महिलाओं के अधिकारों की मांग को मजबूती मिली. आज भी यह उत्सव उसी भावना को जीवित रखता है.
8 मार्च क्यों चुना गया?
8 मार्च 1917 को रूसी महिलाओं ने 'ब्रेड एंड पीस' की मांग के साथ बड़ी हड़ताल की. इसने सरकार पर दबाव डाला और महिलाओं को वोट का अधिकार मिला. ग्रेगोरियन कैलेंडर में यही तारीख तय हुई. 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने इसे आधिकारिक रूप से मान्यता दी, तब से हर साल 8 मार्च वैश्विक महिला दिवस है.
आज का महत्व: सब मिलकर बदलाव लाएं
आज के समय में यह दिन हमें याद दिलाता है कि अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है. 'Give To Gain' थीम हमें प्रेरित करती है कि छोटे-छोटे योगदान से बड़ा बदलाव संभव है. आइए इस 8 मार्च को महिलाओं का सम्मान करें और जेंडर इक्वालिटी के लिए सक्रिय कदम उठाएं.