menu-icon
India Daily

International Women's Day 2024: हर भारतीय महिला को पता होने चाहिए ये 8 कानूनी अधिकार, अन्याय के खिलाफ बनेंगे उनके हथियार

International Women's Day 2024: हर साल 8 मार्च को इंटरनेशनल वूमेन्स डे मनाया जाता है. महिलाओं को समानता का अधिकार मिलना उनका हक है. इस कारण महिलाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए भारत में कुछ कानून बनाए गए हैं. इन कानूनों का पता हर महिला को होना चाहिए, जिससे किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ वे लड़ सकें. 

India Daily Live
International Women's Day 2024: हर भारतीय महिला को पता होने चाहिए ये 8 कानूनी अधिकार, अन्याय के खिलाफ बनेंगे उनके हथियार
Courtesy: pexels

International Women's Day 2024: विश्व महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है, लेकिन आज भी कई महिलाएं अपने अधिकारों से वंचित हैं. इसके साथ ही वे अपने अधिकारों की जानकारी के अभाव में अन्याय को सह रही हैं. अगर आप एक भारतीय महिला हैं तो आपको अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए. ये कानूनी अधिकार किसी भी अन्याय के खिलाफ आपके हथियार बनते हैं. 

आज के दौर में महिलाएं किसी भी मामले में पुरुषों से कम नहीं हैं. हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपना परचम लहराया है. घर हो या बाहर, दोनों जिम्मेदारियों को महिलाएं बखूबी निभा रही हैं. वहीं, कुछ ऐसी भी महिलाएं हैं, जो अपने अधिकारों की जानकारी के अभाव में अन्याय को सह रही हैं. इसके साथ ही कई महिलाएं घर, पब्लिक प्लेस या फिर ऑफिस में भी अपराध का शिकार हो रही हैं. ऐसे में जरूरी है कि हर महिला को अपने उन अधिकारों के बारे में जानना, जो हर अन्याय के खिलाफ उनका हथियार बन सकता है. आइए जानते हैं कि वे कौन से अधिकार हैं, जो हर महिला को जानने चाहिए. 

राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम

भारत सरकार ने 31 जनवरी 1992 को संसद के एक अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय महिला आयोग की स्थापना की. इस आयोग का कार्य महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा करना है. महिलाएं अपनी परेशानी को लेकर यहां पर शिकायत कर सकती है. 

पॉस्को एक्ट 

प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट (पॉस्को) को बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है. इस कानून को 2012 में पारित किया गया था. इसके तहत बच्चों के साथ होने वाले यौन शोषण को अपराध की श्रेणी में रखा गया है और यह कानून 18 साल से कम उम्र के लड़के और लड़कियों की रक्षा करने लिए बनाया गया है. 

दहेज निषेध अधिनियम

इस कानून के अनुसार दहेज लेना और देना दोनों ही अपराध की श्रेणी में है. आज भी कई महिलाएं दहेज न दे पाने के कारण शादी से वंचित रह जाती हैं या फिर कम दहेज देने पर मार दी जाती हैं. इस समस्या को खत्म करने के लिए दहेज निषेध अधिनियम बनाया गया था. इसके तहत अगर कोई दहेज के नाम पर आपको प्रताड़ित करता है तो आप उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत कर सकती हैं. 

मैटरनिटी लाभ अधिनियम

इस अधिकार को महिलाओं के रोजगार और उनके मातृत्व लाभ को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया था. इस तहत हर कामकाजी महिला को प्रेग्नेंसी के दौर में छह माह के लिए मैटरनिटी लीव मिलती है. इस दौरान महिलाओं को पूरी सैलरी दी जाती है. यह कानून हर सरकार और गैर सरकारी संस्था पर लागू होता है. अगर किसी महिला कर्मचारी ने प्रेग्नेंसी से पहले 12 महीनों के दौरान 80 दिनों तक काम किया है तो वह मैटरनिटी लाभ पाने की हकदार होती है. 

वर्कप्लेस पर उत्पीड़न को लेकर बना है कानून 

अगर किसी महिला को उसके कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के उत्पीड़न से गुजरना पड़ता है तो वह आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकती है. इसके लिए पॉश कमेटी गठित की गई है. 

समान पारिश्रमिक अधिनियम 

इस अधिनियम के अनुसार एक ही तरह के काम करने के लिए महिला और पुरुष दोनों को समान मेहनताना पाने का अधिकार है. यह अधिनियम 8 मार्च 1976 में पास हुआ था. 

इस समय पर नहीं हो सकती हैं महिलाएं गिरफ्तार

किसी भी महिला आरोपी को शाम 6 बजे के बाद और सुबह 6 बजे से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है. धारा 160 के अनुसार अगर किसी महिला से पुलिस को पूछताछ भी करनी है तो महिला कांस्टेबल की मौजूदगी आवश्यक है. 

घरेलू हिंसा के लिए भी है कानून

अगर किसी लड़की या महिला को घर पर प्रताड़िता किया जा रहा है तो वह इसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकती है.