नई दिल्ली: भारत में बढ़ती तोंद और पेट के आसपास जमा चर्बी एक आम समस्या बनती जा रही है. पहले जहां मोटापा मुख्य रूप से अधिक उम्र के लोगों में देखा जाता था, वहीं अब युवा वर्ग भी इस समस्या का सामना कर रहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कोई एक कारण नहीं, बल्कि खानपान, जीवनशैली, नींद और शारीरिक गतिविधियों से जुड़ी कई आदतें जिम्मेदार हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय आहार में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है. रोटी, चावल, आलू और अन्य स्टार्च युक्त खाद्य पदार्थ दैनिक भोजन का बड़ा हिस्सा होते हैं. इसके मुकाबले प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन अपेक्षाकृत कम किया जाता है. पर्याप्त प्रोटीन न मिलने से मांसपेशियों का विकास प्रभावित होता है और शरीर में अतिरिक्त कैलोरी वसा के रूप में जमा होने लगती है.
इसके अलावा दिनभर में कई बार मीठी चाय, बिस्कुट, नमकीन और अन्य स्नैक्स खाने की आदत भी अतिरिक्त कैलोरी बढ़ाती है. लगातार अधिक कैलोरी लेने और कम शारीरिक गतिविधि करने से पेट के आसपास फैट जमा होने लगता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि संतुलित आहार और नियमित व्यायाम इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं.
आधुनिक जीवनशैली भी बढ़ते मोटापे का एक बड़ा कारण मानी जा रही है. कार्यालयों में लंबे समय तक बैठकर काम करने और शारीरिक गतिविधियों में कमी आने से कैलोरी बर्न कम होती है. इसके साथ ही देर रात भारी भोजन करने की आदत भी वजन बढ़ाने में योगदान देती है. कई लोग रात में भोजन करने के तुरंत बाद सो जाते हैं, जिससे शरीर को भोजन पचाने और ऊर्जा खर्च करने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता.
नींद और तनाव का भी शरीर के वजन पर गहरा प्रभाव पड़ता है. कम नींद लेने और लगातार मानसिक तनाव में रहने से शरीर के हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं. इससे भूख बढ़ने और वजन बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है. पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण को स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.
विशेषज्ञों का सुझाव है कि तोंद कम करने के लिए केवल डाइटिंग पर निर्भर रहने के बजाय जीवनशैली में स्थायी बदलाव करने चाहिए. भोजन में दाल, पनीर, अंडे और अन्य प्रोटीन स्रोत शामिल करना, रोजाना पैदल चलना, जंक फूड और मीठे पेय कम करना तथा नियमित व्यायाम करना लाभकारी हो सकता है.