अनंत अंबानी के फिटनेस ट्रेनर स्लिप डिस्क की परेशानी से कैसे उबरे? वीडियो जारी कर खुद बताया
सेलिब्रिटी फिटनेस ट्रेनर विनोद चन्ना ने बताया कि कैसे उन्होंने गंभीर स्लिप डिस्क के बाद 18 महीनों में धीरे-धीरे ट्रेनिंग, सही मार्गदर्शन और मजबूत मानसिकता के सहारे पूरी तरह फिटनेस हासिल की. वे कहते हैं 'रिकवरी की सबसे बड़ी बाधा दर्द नहीं, डर होता है'.
नई दिल्ली: स्लिप डिस्क जैसी गंभीर चोट किसी भी व्यक्ति की दिनचर्या, आत्मविश्वास और फिटनेस को पूरी तरह बदल सकती है. रोजमर्रा के आसान काम मुश्किल हो जाते हैं, वर्कआउट रुक जाता है और मन में डर बैठ जाता है कि क्या अब फिर से पहले जैसा चला जा सकेगा या नहीं. लेकिन इसी चुनौती को हराकर एक प्रेरणादायक उदाहरण बने हैं सेलिब्रिटी फिटनेस ट्रेनर विनोद चन्ना.
अनंत अंबानी और नीता अंबानी जैसे हाई-प्रोफाइल क्लाइंट्स को फिटनेस ट्रांसफॉर्मेशन में मार्गदर्शन देने वाले विनोद चन्ना ने 17 नवंबर को अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में अपनी स्लिप डिस्क रिकवरी की कहानी साझा की. उन्होंने बताया कि कैसे 18 महीने तक गंभीर दर्द झेलने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आज वे पूरी तरह फिट होकर सक्रिय जीवन जी रहे हैं.
स्लिप डिस्क को लेकर सबसे बड़ी समस्या, दर्द नहीं, दिमाग में बैठा डर
विनोद चन्ना कहते हैं कि चोट के बाद सबसे बड़ी बाधा शारीरिक दर्द नहीं बल्कि मानसिक डर होता है. लोग मान लेते हैं कि स्लिप डिस्क के बाद ठीक होना मुश्किल है या फिर भारी गतिविधियां कभी नहीं की जा सकतीं.
वह कहते हैं कि लोग सोचते हैं स्लिप डिस्क हो गई मतलब अब जिंदगी भर सावधानी और सीमाएं. लेकिन यह सच नहीं है. मैंने 18 महीने तक दर्द झेला, लेकिन आज मैं आसानी से अपनी पीठ मोड़ सकता हूं और एक्टिव ट्रेनिंग कर सकता हूं. फर्क बस सही प्रक्रिया और धैर्य का है.
चन्ना बताते हैं कि लोग चोटों के आसपास अपने मन में मिथकों की दीवारें खड़ी कर लेते हैं, जो असल में उनके ठीक होने की प्रक्रिया को रोकती हैं. धीमी प्रगति, सही मार्गदर्शन और अनुशासन इसी का नाम है रिकवरी. विनोद बताते हैं कि उन्होंने जल्दबाजी नहीं की, बल्कि अपने शरीर को धीरे-धीरे मजबूत किया. हर स्टेप पर अपने शरीर से संवाद किया और विशेषज्ञ सलाह की मदद ली. वह कहते हैं कि अगर आपके पास सही गाइडेंस, धैर्य और अपनी गति से आगे बढ़ने की हिम्मत है, तो आप किसी भी चोट से उभर सकते हैं.
चन्ना की कहानी क्यों महत्वपूर्ण है?
आज की लाइफस्टाइल में बैक पेन और स्पाइन से जुड़ी समस्याएं बेहद आम हो चुकी हैं. कई लोग डर के कारण अपने शरीर को चलाना भी बंद कर देते हैं. ऐसे में विनोद चन्ना की रिकवरी यात्रा बताती है कि सही एक्सरसाइज, नियमितता, नियंत्रित प्रगति और मानसिक मजबूती किसी भी चोट को मात दे सकती है.
उनकी कहानी यह सिखाती है कि पीठ की चोटें आपकी सीमाएं तय नहीं करतीं, आपकी मानसिकता करती है. धैर्य और सही ट्रेनिंग के साथ शरीर खुद को फिर से मजबूत बना सकता है.
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