पेट्रोल-डीजल पर बड़ी राहत! सरकार ने घटाया 'विंडफॉल टैक्स', 1 जून से लागूं होंगी नई दरें
भारत सरकार ने 1 जून से पेट्रोल, डीजल और हवाई ईंधन के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स में भारी कटौती का एलान किया है. इस फैसले से रिलायंस और ओएनजीसी जैसी तेल कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी.
वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच देश की तेल कंपनियों के लिए सरकार के पिटारे से एक बड़ी राहत भरी खबर निकली है. जून का महीना शुरू होने से ठीक पहले टैक्स के मोर्चे पर बड़ा बदलाव किया गया है. केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और हवाई ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में भारी कटौती करने का एलान किया है. टैक्स की ये नई दरें 1 जून से लागू होने जा रही हैं, जिससे तेल निर्यात करने वाली और रिफाइनिंग कंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
नए नियमों में क्या बदला?
नए नियमों के अनुसार पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स को सीधे आधा यानी 50 फीसदी कम कर दिया गया है जिससे अब यह घटकर 1.50 रुपये प्रति लीटर रह गया है. इसी तरह डीजल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स को 16.50 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 13.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. इसके अलावा हवाई जहाज के ईंधन यानी एटीएफ पर भी सरकार ने बड़ा कट लगाया है और इसे 16 रुपये प्रति लीटर से घटाकर सीधे 9.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया है.
पेट्रोल-डीजल के देश में रहेंगे वही दाम
वित्त मंत्रालय ने इस बात को बिल्कुल साफ कर दिया है कि इस कटौती का देश के भीतर बिकने वाले पेट्रोल-डीजल पर कोई असर नहीं पड़ेगा यानी घरेलू खपत वाले ईंधन पर टैक्स पहले जैसा ही रहेगा. इसके साथ ही पेट्रोल-डीजल के निर्यात पर लगने वाला रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस भी शून्य पर बना रहेगा. आपको बता दें कि इस स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी की समीक्षा सरकार हर दो हफ्ते में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर करती है.
पहली बार जुलाई 2022 में लगाया गया था विंडफॉल टैक्स
भारत सरकार ने पहली बार यह विंडफॉल टैक्स जुलाई 2022 में लगाया था जब वैश्विक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं. तब सरकार का मकसद यह था कि देश के भीतर तेल की कमी न हो और कंपनियां जो बंपर मुनाफा कमा रही हैं उसका एक हिस्सा टैक्स के रूप में सरकारी खजाने में भी आए.
इस टैक्स कटौती का सबसे बड़ा फायदा रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी प्राइवेट रिफाइनिंग कंपनियों को मिलेगा जो गुजरात के जामनगर से भारी मात्रा में डीजल और हवाई ईंधन विदेशों में एक्सपोर्ट करती हैं. इसके अलावा ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी सरकारी कंपनियों को भी इस फैसले से बड़ी राहत मिलेगी.