नई दिल्ली: दुनिया के ज्यादातर देशों में नीली जींस एक आम फैशन मानी जाती है, लेकिन उत्तरी कोरिया में इसे पहनना कानूनन अपराध माना जाता है. यहां नागरिकों के लिए नीली जींस पहनने पर सख्त पाबंदी लागू है. इस नियम के पीछे का कारण सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि राजनीतिक और सांस्कृतिक विचारधारा से जुड़ा है.
उत्तर कोरिया की सरकार नीली जींस को अमेरिकी संस्कृति और पूंजीवाद का प्रतीक मानती है. देश की सत्ता इसे पश्चिमी प्रभाव का चिन्ह समझती है, जिसे वहां के समाज में बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए. इसी वजह से इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है.
अगर कोई व्यक्ति इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसे कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार दोषी पाए जाने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है, सार्वजनिक रूप से सजा दी जा सकती है या जेल भी भेजा जा सकता है. यह कानून सख्ती से लागू किया जाता है ताकि नागरिक सरकार के तय नियमों का पालन करें.
यहां फैशन पर नियंत्रण सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं है. सरकार ने हेयर स्टाइल को लेकर भी सख्त नियम बनाए हैं. महिलाओं के लिए लगभग 18 और पुरुषों के लिए करीब 10 तरह के हेयर स्टाइल ही मंजूर किए गए हैं. इनसे अलग स्टाइल अपनाने पर भी कार्रवाई हो सकती है.
पिछले कुछ वर्षों में इन पाबंदियों का दायरा और बढ़ा है. स्किनी जींस, फटी हुई जींस और बॉडी पियर्सिंग जैसी चीजों पर भी रोक लगाई गई है. इन्हें समाजवाद के खिलाफ व्यवहार माना जाता है. सरकार का मानना है कि ऐसे फैशन से विदेशी संस्कृति का प्रभाव बढ़ता है, जो देश की विचारधारा के खिलाफ है.
हालांकि दिलचस्प बात यह है कि सभी प्रकार की जींस पर प्रतिबंध नहीं है. काली जींस पहनने की अनुमति दी जाती है क्योंकि इसे अमेरिकी संस्कृति से सीधे तौर पर नहीं जोड़ा जाता.
विदेशी पर्यटकों को भी इन नियमों का पालन करना जरूरी होता है. खासकर स्मारक स्थलों और संवेदनशील जगहों पर नीली जींस पहनना अपमानजनक माना जा सकता है.
इस तरह उत्तर कोरिया में फैशन सिर्फ व्यक्तिगत पसंद का विषय नहीं है, बल्कि यह सरकार की विचारधारा और नियंत्रण का हिस्सा है. यह उदाहरण दिखाता है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में सामाजिक और सांस्कृतिक नियम कितने अलग हो सकते हैं.