नई दिल्ली: जर्मनी आजकल भारतीय छात्रों का पसंदीदा गंतव्य बन चुका है. यहां सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के कारण हजारों युवा हर साल पहुंच रहे हैं. सरकारी विश्वविद्यालयों में ट्यूशन फीस लगभग शून्य है, सिर्फ कुछ सौ यूरो की एडमिनिस्ट्रेटिव फीस देनी पड़ती है. वहीं अमेरिका या ब्रिटेन जैसे देशों में लाखों रुपये खर्च होते हैं. यही नहीं, पढ़ाई के दौरान पार्ट-टाइम काम करने की छूट छात्रों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाती है.
जर्मनी पहुंचते ही छात्रों को अपनी यूनिवर्सिटी के करियर सेंटर से संपर्क करना चाहिए. ये केंद्र विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय छात्रों की मदद करते हैं और पार्ट-टाइम जॉब के अवसर बताते हैं. कई विश्वविद्यालयों में नियमित जॉब फेयर भी लगते हैं, जहां सीधे नियोक्ताओं से बात हो सकती है. इससे शुरुआती संघर्ष काफी कम हो जाता है.
जर्मनी में नौकरी पाने के लिए दोस्तों, परिवार और सोशल मीडिया ग्रुप्स के जरिए नेटवर्क बनाना बहुत फायदेमंद साबित होता है. लोकल लोगों या पहले से वहां रह रहे भारतीय छात्रों से बात करने पर अक्सर छिपे अवसर सामने आते हैं. ऑनलाइन फोरम और लिंक्डइन जैसी प्लेटफॉर्म्स भी इसमें मददगार हैं.
Indeed Deutschland और StepStone Deutschland जैसी लोकप्रिय वेबसाइट्स पर पार्ट-टाइम जॉब के ढेर सारे विकल्प मिलते हैं. इन साइट्स को नियमित रूप से देखें और अपनी प्रोफाइल अपडेट रखें. जर्मन भाषा की बेसिक जानकारी होने पर चयन की संभावना बढ़ जाती है.
अगर कोई खास स्किल या अनुभव है तो रिक्रूटमेंट एजेंसियों से संपर्क करें. ये एजेंसियां ऐसी जॉब्स की जानकारी रखती हैं जो सामान्य वेबसाइट्स पर नहीं दिखतीं. हालांकि, जर्मन भाषा का ज्ञान यहां भी फायदेमंद रहता है.
छात्र फूड सर्विस में वेटर, किचन हेल्पर या कैफे में काम कर सकते हैं. अंग्रेजी ट्यूशन देने या रिटेल सेक्टर में सेल्स का काम भी लोकप्रिय है. इन जॉब्स में फ्लेक्सिबल टाइमिंग मिलती है, लेकिन जर्मन भाषा सीखना जरूरी है ताकि कम्युनिकेशन आसान रहे.