नई दिल्ली: आईटी सेक्टर में स्थिर करियर का सपना देखने वाले लाखों युवाओं के बीच एक खबर ने अचानक हलचल मचा दी है. देश की बड़ी टेक कंपनियों में गिनी जाने वाली टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस को लेकर ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है.
रिपोर्ट के अनुसार कंपनी अपने हजारों कर्मचारियों की परफॉर्मेंस का दोबारा मूल्यांकन कर रही है. अंदरूनी ईमेल में मैनेजर्स से उन कर्मचारियों की सूची मांगी गई है जिन्हें सबसे कमजोर प्रदर्शन श्रेणी में रखा जा सकता है. इसी के बाद नौकरी कटौती की आशंका तेज हो गई है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने अपने प्रबंधकों को निर्देश दिया है कि वे अपने कम से कम 5% कर्मचारियों (25,000 कर्मचारियों) को सबसे निचले प्रदर्शन स्तर, 'बैंड डी' में वर्गीकृत करें. इस कदम से भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी में कर्मचारियों के बीच नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
अप्रैल में टीसीएस के एक मानव संसाधन अधिकारी द्वारा एक बिजनेस यूनिट प्रमुख को भेजे गए एक आंतरिक ईमेल में कथित तौर पर कहा गया था, 'कृपया गंभीरता से समीक्षा करें और उन सहयोगियों की लिस्ट शेयर करें जिन्हें बैंड डी के लिए विचार किया जा सकता है, जिससे सहमत 5% वितरण को पूरा किया जा सके,' जो लक्ष्य-आधारित मूल्यांकन दृष्टिकोण को उजागर करता है.
यह घटनाक्रम टीसीएस द्वारा एक बड़े पैमाने पर किए गए कार्यबल पुनर्गठन के तुरंत बाद सामने आया है, जिसमें लगभग 2% कर्मचारियों की छंटनी भी शामिल थी, जिनमें से कई को कम प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों के रूप में वर्गीकृत किया गया था. कंपनी में वर्तमान में लगभग 584,519 कर्मचारी कार्यरत हैं.
कुछ समय पहले आपने नासिक TCS धर्मांतरण मामले के बारे में तो सुना ही होगा. यहां पर कन्वर्जन का काम इतना तेजी से चल रहा था कि एक अलग ही मुद्दा बनकर उभरा था. इस मामले की मुख्य आरोपी निदा खान महाराष्ट्र में गिरफ्तार कर लिया गया. रिपोर्ट के अनुसार कंपनी में लंबे समय से कई कर्मचारियों को झांसे में लिया जा रहा था. हालांकि इस मामले की जांच चल रही है. सभी आरोपी से पूछताछ जारी है.