नई दिल्ली: देश में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. पेपर लीक विवाद और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच इस परीक्षा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. दिल्ली से लेकर दूसरे राज्यों तक इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि NEET क्या है, इसका उद्देश्य क्या है और यह परीक्षा देश की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था में कितनी अहम भूमिका निभाती है. NEET को लेकर कई राजनीतिक दल भी अपनी-अपनी राय रख रहे हैं. कुछ संगठन परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं, जबकि कई छात्र इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं. इसी बीच NEET की फुल फॉर्म, परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था, 2026 के पेपर लीक मामले और री-एग्जाम से जुड़े कई सवाल लोगों के मन में हैं. आइए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब.
NEET का पूरा नाम नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (National Eligibility cum Entrance Test) है. हिंदी में इसे राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा कहा जाता है. यह देश की प्रमुख मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसके माध्यम से सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में विभिन्न मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है.
NEET परीक्षा का आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) करती है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, NTA के चेयरमैन प्रोफेसर प्रदीप कुमार जोशी हैं, जबकि महानिदेशक (DG) अभिषेक सिंह हैं. एजेंसी हर वर्ष परीक्षा आयोजित कर मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया संचालित करती है.
सीबीआई जांच के अनुसार, 2026 के NEET UG पेपर लीक मामले में NTA से जुड़े अंदरूनी सूत्रों और कुछ विशेषज्ञों की भूमिका की जांच की गई. जांच में आरोप है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले चोरी कर कोचिंग नेटवर्क के जरिए बेचा गया. साथ ही Telegram और WhatsApp के माध्यम से प्रश्नपत्र साझा किए जाने की बात भी जांच में सामने आई.
पेपर लीक मामले के बाद NTA ने 12 मई 2026 को परीक्षा रद्द की. इसके बाद 21 जून 2026 को री-एग्जाम आयोजित किया गया. इस परीक्षा का परिणाम 16 जुलाई 2026 को घोषित हुआ. री-एग्जाम में लगभग 19.99 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 11.1 लाख उम्मीदवार सफल घोषित किए गए.
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े पेपर लीक के मामले कई बार सामने आ चुके हैं. 2026 और 2024 में NEET UG परीक्षा विवादों में रही. इससे पहले 2015 में AIPMT परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित की गई थी. इन्हीं घटनाओं के चलते परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर लगातार बहस जारी है.