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हिंदी मीडियम से UPSC, 23 साल में IAS और अब गुजरात के सबसे युवा DM... गंगा सिंह की कहानी बनेगी प्रेरणा

राजस्थान के छोटे से गांव से आने वाले आईएएस गंगा सिंह राजपुरोहित ने हिंदी माध्यम से यूपीएससी परीक्षा पास कर नई मिसाल कायम की.

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Edited By: Reepu Kumari
हिंदी मीडियम से UPSC, 23 साल में IAS और अब गुजरात के सबसे युवा DM... गंगा सिंह की कहानी बनेगी प्रेरणा
Courtesy: Pinterest

UPSC Success Story: अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत में कोई कमी न हो, तो साधारण परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक पातीं. राजस्थान के छोटे से गांव से निकलकर आईएएस अधिकारी बने गंगा सिंह राजपुरोहित ने इसी सोच को सच साबित किया है. हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले गंगा सिंह ने यूपीएससी परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की और अब गुजरात के सबसे युवा जिला कलेक्टर बनने का गौरव भी अपने नाम कर लिया है. हाल ही में गंगा सिंह राजपुरोहित ने गुजरात के नर्मदा जिले के जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यभार संभाला है. यह उनके प्रशासनिक करियर की पहली जिला कलेक्टर पोस्टिंग है. नई जिम्मेदारी के साथ उन्होंने राज्य के सबसे युवा डीएम के रूप में भी अपनी पहचान बनाई है. उनकी यह उपलब्धि आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है.

सीमा से सटे छोटे गांव से शुरू हुआ सफर

गंगा सिंह राजपुरोहित का जन्म 5 मई 1994 को राजस्थान के बालोतरा जिले की सिणधरी तहसील के डंडाली गांव में हुआ. भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास बसे इस गांव की आबादी करीब दो हजार है. उन्होंने शुरुआती शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से प्राप्त की. पढ़ाई में हमेशा आगे रहने वाले गंगा सिंह ने दसवीं कक्षा में 76 प्रतिशत अंक हासिल कर स्कूल में पहला स्थान प्राप्त किया था.

दादाजी की सलाह पर चुना हिंदी माध्यम

स्कूल के बाद उन्होंने जालोर से विज्ञान विषय में स्नातक (बीएससी) की पढ़ाई पूरी की. सिविल सेवा की तैयारी के दौरान उन्होंने अपने दादाजी की प्रेरणा से हिंदी माध्यम चुना. इतना ही नहीं, यूपीएससी मुख्य परीक्षा में उन्होंने हिंदी साहित्य को वैकल्पिक विषय बनाया. उनका यह फैसला आगे चलकर उनकी सफलता की मजबूत नींव साबित हुआ.

दूसरे प्रयास में हासिल की AIR 33

गंगा सिंह राजपुरोहित ने वर्ष 2016 की यूपीएससी परीक्षा अपने दूसरे प्रयास में पास की. उन्होंने पूरे देश में ऑल इंडिया रैंक 33 हासिल की और महज 23 साल की उम्र में 2017 बैच के आईएएस अधिकारी बन गए. उनकी यह उपलब्धि हिंदी माध्यम से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण मानी जाती है.

पहली बार मिली जिला कलेक्टर की जिम्मेदारी

नर्मदा जिले के जिला कलेक्टर के रूप में यह उनकी पहली नियुक्ति है. इससे पहले वे वडोदरा नगर निगम में डिप्टी कमिश्नर के पद पर सेवाएं दे रहे थे. गुजरात कैडर के 2017 बैच के आईएएस अधिकारियों में वे सबसे कम उम्र के जिला कलेक्टर हैं. यह उपलब्धि उनके प्रशासनिक करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है.

हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए बने मिसाल

गंगा सिंह राजपुरोहित की सफलता यह संदेश देती है कि सिविल सेवा परीक्षा में भाषा कभी बाधा नहीं बनती. सही रणनीति, लगातार मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर कोई भी उम्मीदवार अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है. आज उनकी कहानी उन लाखों युवाओं को प्रेरित कर रही है, जो हिंदी माध्यम से यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं और बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं.