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National Engineers Day 2026: 15 सितंबर क्यों है खास? एक इंजीनियर की कहानी, जिसने विकास का मतलब बदल दिया

15 सितंबर को देश नेशनल इंजीनियर्स डे मनाता है. यह दिन भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया की जयंती को समर्पित है. सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले विश्वेश्वरैया ने सिंचाई, जल प्रबंधन, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान दिया.

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Edited By: Reepu Kumari
National Engineers Day 2026: 15 सितंबर क्यों है खास? एक इंजीनियर की कहानी, जिसने विकास का मतलब बदल दिया
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: हर साल 15 सितंबर को देश में नेशनल इंजीनियर्स डे मनाया जाता है. यह दिन भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है. इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करते हुए यह दिन देश के विकास में तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका को भी सामने लाता है. विश्वेश्वरैया ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और अपनी तकनीकी समझ का इस्तेमाल सिंचाई, जल प्रबंधन, उद्योग और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में किया.

सर एम. विश्वेश्वरैया का काम केवल किसी एक परियोजना तक सीमित नहीं था. उन्होंने ऐसी योजनाओं और व्यवस्थाओं पर काम किया, जिनका उद्देश्य लोगों की जरूरतों को पूरा करना और विकास को गति देना था. वह 1912 से 1918 तक मैसूर के दीवान रहे. इस दौरान उन्होंने शिक्षा, उद्योग और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया. उनके प्रयासों से मैसूर में कई संस्थानों और उद्योगों को बढ़ावा मिला, जिसके चलते उन्हें ‘मॉडर्न मैसूर का पिता’ भी कहा गया.

जल प्रबंधन से जुड़ी बड़ी पहल

कृष्णराज सागर बांध विश्वेश्वरैया के प्रमुख कार्यों में शामिल है. कावेरी नदी पर बने इस बांध के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. इससे सिंचाई और जल आपूर्ति को मदद मिली. इसके अलावा पुणे के पास खडकवासला जलाशय में उन्होंने स्वचालित वाटर फ्लडगेट्स से जुड़ी सिंचाई व्यवस्था विकसित की. तकनीक के इस इस्तेमाल ने उन्हें इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अलग पहचान दिलाई.

बाढ़ से बचाव की योजना

हैदराबाद में बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए भी विश्वेश्वरैया ने महत्वपूर्ण योगदान दिया. उन्होंने वाटर मैनेजमेंट और ड्रेनेज सिस्टम तैयार करने में भूमिका निभाई. उनके काम का एक बड़ा हिस्सा यह सुनिश्चित करने से जुड़ा था कि पानी जैसी प्राकृतिक चुनौती को बेहतर तकनीकी व्यवस्था के जरिए नियंत्रित किया जा सके. यही वजह है कि उनका नाम भारत में जल प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण इंजीनियरों में लिया जाता है.

उद्योगों को मिला नया रास्ता

विश्वेश्वरैया ने मैसूर के औद्योगिक विकास पर भी जोर दिया. उनके प्रयासों से भद्रावती आयरन एंड स्टील वर्क्स और मैसूर संदल ऑयल एंड सोप फैक्टरी जैसे उद्योगों को बढ़ावा मिला. उनका मानना था कि किसी क्षेत्र का विकास केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि रोजगार और उद्योगों के विस्तार से भी जुड़ा होना चाहिए. मैसूर में उनके कार्यकाल के दौरान इसी सोच को आगे बढ़ाने की कोशिश हुई.

शिक्षा को भी दी प्राथमिकता

विश्वेश्वरैया ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 1917 में उन्होंने कर्नाटक में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना में अहम योगदान दिया. यह संस्थान आज यूनिवर्सिटी विश्वेश्वरैया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के नाम से जाना जाता है. देश के विकास में उनके योगदान को देखते हुए 1955 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया. ब्रिटिश सरकार ने भी उन्हें नाइट कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द इंडियन एम्पायर की उपाधि दी थी. 1962 में 102 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ.