कलेक्टर का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के जेहन में अधिकारियों की टीम, प्रोटोकॉल और औपचारिक निरीक्षण की तस्वीर उभरती है. लेकिन खरगोन के कलेक्टर आईएएस गुरु प्रसाद जब सरकारी स्कूल पहुंचे तो नजारा कुछ अलग था. वह बच्चों के बीच पहुंचे और कक्षा में सबसे पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए. एक बच्ची के साथ बैठकर उन्होंने किताब पढ़ी और पढ़ाई से जुड़े सवाल पूछे. उनकी यह सहजता अब लोगों का ध्यान खींच रही है.
गुरु प्रसाद का मकसद केवल स्कूल की व्यवस्था देखना नहीं था, बल्कि यह समझना भी था कि बच्चों को पढ़ाई के दौरान किन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. खरगोन में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने के लिए ‘मिशन बेंचमार्क’ चलाया जा रहा है. इसी अभियान के तहत निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने बच्चों से सीधे संवाद किया. उनकी सादगी ने अधिकारियों से लेकर स्कूली बच्चों तक, सभी को प्रभावित किया.
स्कूल के निरीक्षण के दौरान गुरु प्रसाद सीधे कक्षा में पहुंचे और सबसे पीछे की कुर्सी पर जाकर बैठ गए. उनके साथ एक बच्ची भी बैठी थी. उन्होंने उसके साथ किताब देखी और पढ़ाई से जुड़े सवाल किए. इस दौरान उन्होंने बच्चों की पढ़ाई के स्तर को समझने की कोशिश की. उनका यह तरीका सामान्य निरीक्षण से अलग था, क्योंकि वह बच्चों से दूरी बनाकर देखने के बजाय उनके बीच बैठकर उनकी स्थिति को समझ रहे थे.
आईएएस गुरु प्रसाद 2017 बैच के अधिकारी हैं और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से आते हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई नवोदय विद्यालय में हुई. इसके बाद उन्होंने आईआईटी कानपुर से बीटेक और एमटेक की पढ़ाई पूरी की. तकनीकी शिक्षा के बाद उन्होंने सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया. यूपीएससी के पहले प्रयास में भारतीय सूचना सेवा, दूसरे में भारतीय राजस्व सेवा और तीसरे प्रयास में भारतीय प्रशासनिक सेवा में उनका चयन हुआ.
खरगोन के 49वें कलेक्टर के तौर पर जिम्मेदारी संभालने के बाद गुरु प्रसाद ने सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी है. ‘मिशन बेंचमार्क’ का उद्देश्य ऐसे स्कूलों में जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना है, जहां बच्चों के लिए पर्याप्त टेबल और बेंच नहीं हैं. जनभागीदारी के जरिए सुविधाएं जुटाने की कोशिश की जा रही है, ताकि विद्यार्थियों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई न करनी पड़े और स्कूलों का माहौल बेहतर बनाया जा सके.
खरगोन कृषि प्रधान और आदिवासी बहुल जिला है. ऐसे में गुरु प्रसाद की प्राथमिकताओं में ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास भी शामिल है. सरकारी स्कूल में बच्चों के बीच बैठकर उनकी पढ़ाई को समझने की तस्वीर इसी सोच की झलक देती है. एक ओर आईआईटी से पढ़े और यूपीएससी में लगातार सफल रहे अधिकारी की उपलब्धियां हैं, तो दूसरी ओर बच्चों के बीच सहज होकर बैठने का उनका अंदाज लोगों के लिए खास संदेश दे रहा है.