Inspiring Journey: बिहार के युवा एसडीएम नसीन कुमार निशांत की सफलता के पीछे कई मुश्किलों से भरा सफर रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका जन्म 13 अप्रैल 1996 को पुपरी में हुआ था. उनके पिता महेंद्र वकील हैं, जबकि मां मंजू कुमारी शिक्षिका थीं. नसीन ने छठी से दसवीं तक डीएवी स्कूल पुपरी सीतामढ़ी में पढ़ाई की. दसवीं में वह टॉपर रहे. इसके बाद दरभंगा के स्कूल से 12वीं की पढ़ाई की और आगे IIT BHU में दाखिला लिया.
नसीन की जिंदगी में सबसे कठिन समय तब आया, जब 20 साल की उम्र में उनकी मां का निधन हो गया. इस घटना ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया. घर में दुख का माहौल था और दूसरी तरफ उन्हें अपनी सफलता को लेकर लोगों के ताने भी सुनने पड़ रहे थे. मां के जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारियां भी उनके कंधों पर आ गईं. इसके बावजूद उन्होंने खुद को संभाला और अपनी पढ़ाई, लक्ष्य और जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटे.
नसीन की मुश्किलें सिर्फ पारिवारिक परिस्थितियों तक सीमित नहीं थीं. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उनका चयन NIT में हुआ था, लेकिन वह IIT से माइनिंग इंजीनियर की डिग्री लेना चाहते थे. इसी वजह से वह कोटा पहुंचे. परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और परिजनों ने उन्हें केवल 35 हजार रुपये दिए थे. कोचिंग की फीस ही 76 हजार रुपये थी. खाने-पीने का खर्च अलग था. ऐसे में उनके सामने पढ़ाई जारी रखने की बड़ी चुनौती थी.
नसीन ने कोचिंग संचालक के पैर पकड़कर अपनी स्थिति बताई और कहा कि वह दसवीं के टॉपर रहे हैं तथा IIT की परीक्षा पास कर सकते हैं. कोचिंग संचालक ने एक महीने बाद टेस्ट की शर्त रखी. कहा गया कि 200 अंक आने पर फीस कम की जा सकती है. नसीन ने उस परीक्षा में 211 अंक हासिल किए और उन्हें नाममात्र फीस में कोचिंग मिली. IIT BHU से इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने कॉरपोरेट नौकरी छोड़ी और BPSC की तैयारी शुरू की.
बिहार लोक सेवा आयोग ने जून 2021 में 64वीं बिहार प्रशासनिक सेवा परीक्षा का परिणाम घोषित किया. नसीन कुमार निशांत ने अपने पहले ही प्रयास में 140वीं रैंक हासिल की. इसी सफलता के साथ उन्होंने महज 22 साल की उम्र में SDM बनने का मुकाम हासिल किया और बिहार के सबसे युवा SDM की सूची में अपना नाम दर्ज कराया. उनकी कहानी बताती है कि आर्थिक परेशानी, पारिवारिक जिम्मेदारियां और लोगों के ताने भी मजबूत इरादों के सामने रास्ता नहीं रोक सके.