Lisa Garg Inspiring Journey: जब बार-बार कोशिश करने के बाद भी सफलता हाथ न लगे, तो इंसान का हौसला टूटने लगता है. परिवार की उम्मीदें, समाज के सवाल और भविष्य की चिंता इस मुश्किल को और बढ़ा देते हैं. लीजा गर्ग की जिंदगी में भी ऐसा ही दौर आया. ग्रेजुएशन के बाद कई साल तक नौकरी नहीं मिली और सरकारी परीक्षाओं में लगातार असफलताओं ने उन्हें भीतर तक परेशान कर दिया. लेकिन उन्होंने अपने सपने को छोड़ने के बजाय संघर्ष जारी रखने का फैसला किया.
लीजा ने ग्रेजुएशन के बाद करीब पांच साल तक बेरोजगारी का सामना किया. इस दौरान उन्होंने कई सरकारी परीक्षाएं दीं, लेकिन बार-बार असफलता मिली. यूपीएससी के 2023 और 2024 के प्रारंभिक प्रयासों में भी उन्हें सफलता नहीं मिली. लगातार नाकामियों ने उनके आत्मविश्वास को प्रभावित किया और करियर को लेकर चिंता बढ़ा दी. जिस मंजिल तक पहुंचने का सपना देखा था, वह दूर होती नजर आ रही थी. फिर भी उन्होंने कोशिश करना नहीं छोड़ा.
लीजा के संघर्ष में परिवार की भावनाएं भी अहम रहीं. उनकी मां प्रोफेसर हैं, जबकि पिता बेटी के भविष्य और आर्थिक सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते थे. मां की आंखों में आंसू देखकर लीजा को दुख होता था. उन्हें लगता था कि उनकी असफलताओं के कारण परिवार भी परेशानी झेल रहा है.
यूपीएससी की तैयारी के दौरान लीजा को पढ़ाई की मुश्किलों के साथ सामाजिक दबाव भी झेलना पड़ा. रिश्तेदारों की ओर से कथित तौर पर यह ताना सुनना कि प्रोफेसर की बेटी होकर भी वह कुछ नहीं कर पाईं, उनके लिए बेहद तकलीफदेह था.
जब संघर्ष के बीच हिम्मत जवाब देने लगी, तब लीजा मंदिर गईं. उनके अनुभव के मुताबिक, उन्होंने वहां सफलता या किसी पद की मांग करने के बजाय मुश्किलों से लड़ने की ताकत मांगी. यह पल उनके लिए नई शुरुआत जैसा रहा. नवंबर 2025 में उन्होंने नई रणनीति के साथ तैयारी शुरू की.
लीजा की मेहनत आखिरकार रंग लाई और उन्होंने यूपीएससी 2025 में ऑल इंडिया रैंक 303 हासिल की. परिणाम में अपना नाम देखना उनके लिए वर्षों की निराशा और संघर्ष के बाद बड़ी राहत का पल रहा होगा. उनकी सफलता ने परिवार की चिंताओं को गर्व में बदल दिया. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लीजा अब भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की अधिकारी हैं.