नई दिल्ली: दिल्ली में पले-बढ़े आदित्य चोपड़ा की कहानी में सफलता के साथ असफलता का भी बड़ा हिस्सा रहा है. इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने लगातार तीन साल UPSC परीक्षा की तैयारी की. तीनों प्रयासों में वह इंटरव्यू राउंड तक पहुंचे, लेकिन अंतिम सूची में जगह नहीं बना सके. इसके बाद आदित्य ने परीक्षा की तैयारी छोड़कर कॉर्पोरेट क्षेत्र का रुख किया. उन्होंने इक्विटी रिसर्च फर्म में काम किया और आगे चलकर सामाजिक प्रभाव वाली कंसल्टिंग कंपनी से जुड़े.
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के नेटवर्क के जरिए आदित्य की मुलाकात माइक्रोप्लास्टिक रिसर्चर प्रोफेसर फे कूसिरो से हुई. बातचीत के दौरान उन्हें बच्चों के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक से जुड़ी चिंताओं के बारे में जानकारी मिली. इसी से उन्हें बेबी प्रोडक्ट्स में प्लास्टिक के इस्तेमाल को लेकर काम करने का विचार आया. उनके मुताबिक, भारत में बिकने वाले करीब 90 प्रतिशत टीथर्स प्लास्टिक के होते हैं. इसके बाद उन्होंने कालीन कारोबार रोकने का फैसला किया.
जुलाई 2025 में आदित्य ने हरियाणा के फरीदाबाद से नूबो की शुरुआत की. ब्रांड ने केवल दो टीथिंग प्रोडक्ट्स के साथ सफर शुरू किया था. अब इसके उत्पादों की संख्या बढ़कर 15 एसकेयू हो चुकी है. कंपनी 100 प्रतिशत फूड-ग्रेड सिलिकॉन और कॉटन-कागज से बने बेबी प्रोडक्ट्स पर काम करती है. आदित्य ने सस्ते प्लास्टिक की सलाह के बजाय उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा को प्राथमिकता देने का फैसला किया.
नूबो के सिलिकॉन टीथर्स BIS IS 9873 मानकों के तहत BPA, PVC और भारी धातुओं से मुक्त प्रमाणित हैं. कंपनी के मुताबिक, इसकी 60-65 प्रतिशत बिक्री 700 से ज्यादा टियर-2 और टियर-3 शहरों से आती है. भोपाल, इंदौर, कोहिमा, आगरा और जयपुर जैसे शहरों में भी ब्रांड की मांग है. कंपनी Amazon, Flipkart, Blinkit और अपनी वेबसाइट के जरिए ग्राहकों तक पहुंच रही है.
नूबो अब तक 20 हजार से ज्यादा ऑर्डर पूरे कर चुका है. कंपनी के मुताबिक, करीब 30-40 प्रतिशत बिक्री बिना किसी विज्ञापन के माउथ-पब्लिसिटी और पेरेंट्स ग्रुप्स के जरिए हो रही है. कंपनी हर महीने करीब 25 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है और जल्द EBITDA-पॉजिटिव स्तर तक पहुंचने का लक्ष्य है. फिलहाल आदित्य आठ सदस्यों की टीम के साथ कंपनी का संचालन कर रहे हैं.
आदित्य अगले 6-7 महीनों में 15 नए उत्पाद लॉन्च करना चाहते हैं, ताकि 0 से 5 साल तक के बच्चों की जरूरतों के लिए ज्यादा विकल्प उपलब्ध हो सकें. कंपनी की योजना दुबई के रास्ते मिडिल ईस्ट और फिर ब्रिटेन व अमेरिका के बाजारों में प्रवेश करने की है. अगला लक्ष्य हर महीने 1 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करना है. इसके बाद चार साल में कंपनी को 200 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.