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Inspiring Journey: दिन में मजदूरी, रात में पढ़ाई… बिजली भी नहीं थी; फिर ऐसे अफसर बने अमरोहा के अभिषेक

उत्तर प्रदेश के अमरोहा के अभिषेक कुमार की कहानी मुश्किल हालात के बीच लक्ष्य पर टिके रहने की मिसाल है. 12वीं में पिता को खोने के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई.

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Edited By: Reepu Kumari
Inspiring Journey: दिन में मजदूरी, रात में पढ़ाई… बिजली भी नहीं थी; फिर ऐसे अफसर बने अमरोहा के अभिषेक
Courtesy: Careerwill App and Grok

Inspiring Journey: जिंदगी में कई बार हालात इंसान के सामने ऐसी चुनौतियां खड़ी कर देते हैं, जहां सपनों को बचाए रखना भी मुश्किल लगता है. अमरोहा के अभिषेक कुमार के सामने भी कुछ ऐसा ही समय आया. किसान परिवार में जन्मे अभिषेक ने छोटी उम्र में पिता को खो दिया और परिवार की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी. घर चलाने के लिए उन्होंने कंस्ट्रक्शन साइट पर काम किया, लेकिन सरकारी नौकरी पाने का सपना उनके मन से कभी दूर नहीं हुआ.

दिनभर मजदूरी करने के बाद रात उनकी पढ़ाई के नाम रहती थी. घर में बिजली तक की सुविधा नहीं थी, इसलिए उन्होंने चार्जिंग लैंप का सहारा लिया. लैंप को पड़ोसियों के घर चार्ज कराया और उसी रोशनी में पढ़ाई जारी रखी. महंगी कोचिंग का खर्च उठाना संभव नहीं था, इसलिए अभिषेक ने मोबाइल और यूट्यूब को अपनी पढ़ाई का जरिया बनाया. लगातार मेहनत के बाद आखिरकार वह दिन भी आया, जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार था.

पिता के जाने के बाद बदली पूरी जिंदगी

अभिषेक अमरोहा के एक गरीब किसान परिवार से आते हैं. उनके पिता खेती करके परिवार का खर्च चलाते थे. वर्ष 2018 में अभिषेक जब 12वीं कक्षा में पढ़ रहे थे, तब शुगर की बीमारी के कारण उनके पिता का निधन हो गया. परिवार में मां, एक छोटी बहन और एक भाई थे. पिता के जाने के बाद कम उम्र में ही अभिषेक को परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालनी पड़ी.

हाथ में औजार था, लेकिन किताबें नहीं छूटीं

परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए अभिषेक ने कंस्ट्रक्शन साइट पर दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम शुरू किया. दिनभर शारीरिक मेहनत के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी. 12वीं के बाद कॉलेज की पढ़ाई का इंतजाम किया और कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी. घर में बिजली नहीं होने के कारण वह चार्जिंग लैंप लेकर आए और पड़ोस में उसे चार्ज करवाकर रात में पढ़ते थे.

कोचिंग नहीं मिली तो मोबाइल बना सहारा

अभिषेक के परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह महंगी कोचिंग का खर्च उठा सकें. ऐसे में उन्होंने यूट्यूब पर उपलब्ध ऑनलाइन सामग्री का इस्तेमाल किया. दिन में काम करने के बाद रात को मोबाइल पर लाइव और रिकॉर्डेड कक्षाएं देखते थे. सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने अपनी तैयारी को लगातार जारी रखा. मेहनत के साथ पढ़ाई का यह सिलसिला लंबे समय तक चलता रहा और आखिरकार इसका नतीजा सामने आया.

SSC CGL रिजल्ट ने बदल दी तस्वीर

लंबे संघर्ष के बाद SSC CGL 2022 की अंतिम चयन सूची में अभिषेक कुमार का नाम आया. उनका चयन कस्टम्स एंड सेंट्रल एक्साइज इंस्पेक्टर के प्रतिष्ठित पद पर हुआ. जिस युवा के कंधों पर कभी परिवार चलाने की जिम्मेदारी थी, उसी के कंधों पर अब तीन स्टार वाली वर्दी सजी. सफलता के बाद अभिषेक राकेश यादव सर से मिलने पहुंचे. उनकी आंखों में वर्षों की मेहनत के बाद मिली कामयाबी की खुशी साफ नजर आई.