नई दिल्ली: गूगल में नौकरी पाने का सपना लाखों युवा देखते हैं. लेकिन जब रिजेक्शन मिलता है तो कई लोग टूट जाते हैं. हाल ही में एक इंजीनियरिंग उम्मीदवार की कहानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर तेजी से वायरल हो रही है, क्योंकि उसने गूगल से मिले रिजेक्शन को हार नहीं बल्कि अपनी सबसे बड़ी सीख बताया. पांच इंटरव्यू राउंड के बाद कंपनी ने उसे चयनित नहीं किया, फिर भी उसने इस अनुभव को जिंदगी का सबसे बेहतरीन करियर मोड़ बताया.
उम्मीदवार ने बताया कि उसने गूगल में फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर पद के लिए आवेदन किया था. इंटरव्यू प्रक्रिया शुरू होने से पहले वह सिस्टम डिजाइन और डेटा स्ट्रक्चर्स एंड एल्गोरिदम जैसे विषयों को लेकर काफी घबराया हुआ था. उसे लगा कि उसकी तैयारी कमजोर है,
रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरव्यू प्रक्रिया 19 मार्च को शुरू हुई और 5 मई को रिजेक्शन के साथ खत्म हुई. लेकिन इन छह हफ्तों में, उम्मीदवार ने खुद को तैयारी में झोक दिया था. 40 छोटे-छोटे ऐप्स भी बनाए.
इस कहानी की खासियत सिर्फ तैयारी ही नहीं, बल्कि नजरिया भी है. चुने न जाने के बावजूद, उम्मीदवार ने इसे शायद अब तक का सबसे बेहतरीन इंटरव्यू अनुभव बताया.
रेडिट पोस्ट युवा पेशेवरों के बीच बढ़ती मानसिकता को दर्शाता है कि साक्षात्कार, विशेष रूप से शीर्ष कंपनियों में, बिना ऑफर लेटर के भी मूल्यवान सीखने के अनुभव बन सकते हैं. निराश होकर चले जाने के बजाय, उम्मीदवार ने फैसला किया कि वह अपने द्वारा सीखी गई हर बात को उन अन्य लोगों के साथ साझा करेगा जो इसी तरह की भूमिकाओं के लिए तैयारी कर रहे हैं.
उन्होंने GitHub रिपॉजिटरी के माध्यम से संसाधन, टेम्पलेट, समस्या सेट और साक्षात्कार की तैयारी से संबंधित सामग्री अपलोड की ताकि अन्य उम्मीदवार भी इस प्रक्रिया से लाभान्वित हो सकें.
उस पोस्ट में उन्होंने बताया कि उनके मूल अपडेट के बाद कई लोगों के मन में सवाल थे, इसलिए उन्होंने सब कुछ एक GitHub गाइड में व्यवस्थित करने का फैसला किया.
उन्होंने दूसरों को भी स्वतंत्र रूप से रिसर्च करने के लिए प्रोत्साहित किया, और कहा कि स्वयं सीखने ने उनकी अपनी तैयारी की यात्रा में एक प्रमुख भूमिका निभाई.
यह कहानी कई नौकरी चाहने वालों को प्रभावित करती है क्योंकि यह सफलता vs विफलता के बजाय कौशल निर्माण और विकास पर ध्यान केंद्रित करती है. प्रतिस्पर्धी भर्ती बाजार में, यह सोच ही कभी-कभी सबसे बड़ी उपलब्धि बन जाती है.