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ईरान युद्ध के लिए पहले से तैयार था चीन! ईधन सप्लाई ब्रेक होने के बाद भी शांत बैठा बीजिंग, क्या है जिनपिंग की तेल रणनीति?

मीडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण विश्व के कई देशों में तेल और गैस की किल्लत होने लगी है. हालांकि बीजिंग में अभी भी शांति है. चीन में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता नजर नहीं आ रहा है. ऐसा क्यों इसके बारे में समझने के लिए इस लेख को पूरा पढ़ें.

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Edited By: Shanu Sharma
ईरान युद्ध के लिए पहले से तैयार था चीन! ईधन सप्लाई ब्रेक होने के बाद भी शांत बैठा बीजिंग, क्या है जिनपिंग की तेल रणनीति?
Courtesy: X (@coinbureau)

विश्व भर में तेल की किल्लत और कीमतों को लेकर हलचल देखने को मिल रही है, हालांकि बीजिंग अभी भी शांत नजर आ रहा है. जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि चीन पहले से ही इस युद्ध की तैयार शुरू कर चुका था. दुनिया भर में कहा जा रहा है कि अगर तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती है तो दुनिया भर में मंदी आ सकती है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण कई देशों में पेट्रोल-डीजल की किल्लत होने लगी है. वहीं चीन के पास पर्याप्त मात्रा में तेल मौजूद है. रिपोर्ट की मानें तो कई महीनों से चीन में इस तरह के संकट से निपटने की तैयारी की जा रही थी. युद्ध शुरू होने से पहले चीन ने भारी मात्रा में तेल खरीदा था. 

चीन कम दामों पर खरीदता रहा क्रूड ऑयल 

कस्टम और शिपिंग डेटा के मुताबिक चीन अपनी घरेलू जरूरत से कहीं ज्यादा कच्चा तेल आयात कर रहा था. इस साल जनवरी और फरवरी में रिफाइनरी में तेल की खपत को घटाने के बाद भी, चीन ने लगभग 1.24 मिलियन बैरल प्रतिदिन का अतिरिक्त भंडार जमा किया था. जिससे यह पता चलता है कि चीन भविष्य के लिए ईधन को जान-बूझकर सुरक्षित कर रहा है. चीन ने ज्यादातर तेल उन देशों से खरीदा है, जहां उसे भारी छूट दी जा रही थी.

बीजिंग ने कुछ दिनों पहले से ही रूस, ईरान और वेनेज़ुएला जैसे देशों से तेल की खरीदारी बढ़ा दी थी. इन देशों पर पश्चिमी देशों ने कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं, जिसके कारण वैश्विक बाजार में इसकी कीमत कम लगते हैं. ऊर्जा विशेषज्ञ के अनुसार चीन की तेल जमा करने की नीति का फायदा उसे अब मिल रहा है. मिल रही जानकारी के मुताबिक चीन भारी मात्रा में कच्चे तेल तब खरीदे थे जब इसके दाम 60 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास थीं.

तेल को कहां और कैसे रिजर्व करता है चीन?

चीन की सबसे खास बात यह है कि उसके पास तेल को जमा करने के लिए पर्याप्त जगह है. पिछले एक से दो दशकों में चीन ने तेल भंडारण की एक विशाल और दो-स्तरीय व्यवस्था तैयार की है. इस व्यवस्था में सरकार के नियंत्रण वाले 'रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार' और सरकारी कंपनियों द्वारा संचालित विशाल 'व्यावसायिक तेल टैंक' साथ जोड़ा गया है.

कुछ तेल भंडार को जमीन के नीचे बनाया गया है, जिसे सुरक्षा के लिहाजा से डिजाइन किया गया है. चीन में कुछ तेल भंडारों को जमीन के ऊपर बनें टैंकों में भी रखा गया है. अनुमान के मुताबिक अभी चीन के पास कुल 1.1 से 1.2 अरब बैरल तेल जमा करने की क्षमता है. हालांकि चीन ने इस युद्ध के लिए सोच कर तेल इकट्ठा नहीं किया था, लेकिन अभी के समय में जिनपिंग की रणनीति काम आ रही है.