ईरान युद्ध के बीच अमेरिका ने किया 'डूम्सडे' मिसाइल का सफल परीक्षण! हिरोशिमा बम से कई गुना ताकतबर है मिनटमैन-III
मध्य पूर्व में ईरान के साथ चल रहे तनाव और सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद अमेरिका ने कैलिफोर्निया से मिनटमैन-III बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. यह नियमित टेस्ट है, लेकिन परमाणु क्षमता के कारण दुनिया में चिंता बढ़ गई है.
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच हिंसक संघर्ष जारी है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्र में हमले और जवाबी कार्रवाई तेज हो गई हैं. ऐसे में अमेरिका ने कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से मिनटमैन-III इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया.
अमेरिकी सेना इसे रूटीन टेस्ट बताती है, लेकिन इसकी परमाणु क्षमता और मौजूदा जंग के समय ने वैश्विक ध्यान खींचा है. यह मिसाइल हिरोशिमा बम से कहीं ज्यादा तबाही मचा सकती है.
मिसाइल परीक्षण की जानकारी
मंगलवार रात लगभग 11 बजे वैंडेनबर्ग बेस से यह निहत्थे रॉकेट को लॉन्च किया गया. मिसाइल प्रशांत महासागर के मध्य भाग में मार्शल द्वीपों के पास निर्धारित लक्ष्य पर पहुंची. यूएस स्पेस फोर्स ने कहा कि यह टेस्ट मिसाइल की सटीकता, तत्परता और प्रभावशीलता जांचने के लिए था. 576वें फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल कैरी व्रे ने बताया कि इससे सिस्टम के विभिन्न हिस्सों का मूल्यांकन हुआ.
मध्य पूर्व में बढ़ता संकट
खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर लगातार हमले किए. हिज्बुल्लाह के सक्रिय होने पर इजरायल ने बेरुत में बड़े हमले किए. राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर और सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है. पूरा क्षेत्र युद्ध की आग में घिरा है, जहां जवाबी हमले रोजाना हो रहे हैं.
मिनटमैन-III की खासियत
यह अमेरिका की सबसे पुरानी आईसीबीएम है, जो 1970 से सेवा में है. 13,000 किलोमीटर तक मार कर सकती है और परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम है. अमेरिका के पास करीब 400 ऐसी मिसाइलें हैं. यह 'मिनटमैन' इसलिए कहलाती है क्योंकि एक मिनट में तैयार हो जाती है. इस टेस्ट में कोई हथियार नहीं था.
क्यों हुआ यह टेस्ट
अमेरिकी एयर फोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड ने स्पष्ट किया कि यह परीक्षण सालों पहले निर्धारित था और रूटीन है. यह अमेरिका के परमाणु त्रिकोण का हिस्सा है, जो परमाणु हमले से बचाव और जवाबी क्षमता सुनिश्चित करता है. 2030 तक इसे नई मिसाइल से बदला जाएगा, लेकिन फिलहाल टेस्ट जारी रहेंगे.
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