अरब सागर में अमेरिका ने ईरानी तेल ले जा रहे जहाज को रोका, अब तक 37 शिप लौटे वापस

अरब सागर में अमेरिका ने ईरानी तेल ले जा रहे जहाज ‘सेवान’ को रोककर वापस भेज दिया. ब्लॉकेड के बाद अब तक 37 जहाज रोके जा चुके हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: अरब सागर में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक और जहाज को रोकते हुए सख्त संदेश दिया है कि सैंक्शन तोड़ने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी. 'सेवान' नाम का यह जहाज ईरान के तेल और गैस को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने जा रहा था, लेकिन अमेरिकी नौसेना ने इसे बीच समुद्र में रोककर वापस लौटा दिया. इस कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई हलचल पैदा कर दी है.

‘सेवान’ जहाज को कैसे रोका गया

अमेरिकी नौसेना ने गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस पिंकनी के जरिए इस कार्रवाई को अंजाम दिया. इस जहाज से उड़ान भरने वाले हेलिकॉप्टर ने अरब सागर में 'सेवान' को इंटरसेप्ट किया और उसे आगे बढ़ने से रोक दिया. अमेरिकी सेना के निर्देश मिलने के बाद जहाज के कप्तान और क्रू ने सहयोग किया और जहाज को वापस ईरान की ओर मोड़ दिया गया. यह पूरी कार्रवाई समुद्र के बीच बेहद सतर्कता के साथ की गई, ताकि किसी तरह का टकराव न हो.

शैडो फ्लीट और सैंक्शन की कहानी

'सेवान' उन 19 जहाजों के समूह का हिस्सा है, जिसे 'शैडो फ्लीट' कहा जाता है. ये जहाज ईरान के तेल और गैस उत्पादों को विभिन्न देशों तक पहुंचाते हैं. अमेरिका ने इन जहाजों पर पहले से ही सख्त प्रतिबंध लगाए हुए हैं. वाशिंगटन का मानना है कि इन जहाजों के जरिए ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है और प्रतिबंधों से बचने की कोशिश कर रहा है. इसी वजह से अमेरिका लगातार इन जहाजों को निशाना बना रहा है.

ब्लॉकेड के बाद बढ़ती सख्ती

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ब्लॉकेड लागू होने के बाद अब तक कुल 37 जहाजों को रोका या वापस भेजा जा चुका है. यह आंकड़ा दिखाता है कि अमेरिका इस अभियान को लेकर कितना गंभीर है. समुद्र में निगरानी बढ़ा दी गई है और हर संदिग्ध जहाज पर नजर रखी जा रही है. अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि सैंक्शन का उल्लंघन करने वाले किसी भी जहाज को बख्शा नहीं जाएगा.

वैश्विक असर और बढ़ता तनाव

इस कार्रवाई का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक बाजार पर भी पड़ सकता है. ईरान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल और गैस निर्यात पर निर्भर है, ऐसे में इन जहाजों को रोकने से उसे आर्थिक नुकसान हो सकता है. साथ ही, अरब सागर में बढ़ते तनाव से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका है. दुनिया के कई देश इस स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं.