अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी जारी है. अमेरिका की उम्मीद से कई गुना ज्यादा शक्तिशाली तरीके से ईरान ने इस युद्ध को लड़ा है. हालांकि अमेरिका भी इस युद्ध में जीत के लिए अपनी पूरी ताकत को आजमा रहा है. इसी बीच US स्टेट डिपार्टमेंट ने एक नया फरमान सुनाया है. जिसका सीधा असर भारत पर पड़ने वाला है.
अमेरिका ने ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों को खरीदने से रोकने के लिए भारत की चार कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इस बात की घोषणा की . उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' नाम से प्रतिबंधों का एक नया अभियान शुरू किया जा रहा है. जिसका मकसद ईरान की कमाई के सभी रास्तों को बंद करना है.
अमेरिका ने दुनिया के सभी देशों से तेहरान के साथ अपने आर्थिक रिश्ते को तोड़ने की अपील की है. साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए यह भी कहा है कि जो देश भी तेहरान के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते बनाए रखेगा उसे जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. बेसेंट ने अमेरिका के इस कदम को ईरान को वित्तीय रूप से खोखला करने का एक अभूतपूर्व अभियान बताया है. अमेरिका के इस ऐलान से उन देशों और संगठनों पर खतरा बढ़ गया है, जो अपने मुनाफा-नुकसान को देखते हुए तेहरान के साथ व्यावसायिक रिश्ते बनाए रखे थे.
अमेरिका ने जिन चार भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं, उनमें 'पोर्टईज पार्टनर्स LLP' के अलावा 'सदाशिव ओवरसीज लिमिटेड', 'PP सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड' और 'प्रकृतिस इंफ्रा इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड' शामिल हैं. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने इन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाते हुए सारे डिटेल्स भी बताए हैं. जिसमें उन्होंने बताया कि 'सदाशिव ओवरसीज' ने कई कंपनियों से लगभग 69 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया गया, जबकि 'PP सॉफ्टटेक' और 'प्रकृतिस इंफ्रा' ने लगभग 25-25 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया है. उन्होंने कहा कि इन कंपनियों ने ईरान के साथ जानबूझकर डील किए, जिसके कारण इनपर प्रतिबंध लगाए गए हैं.