नई दिल्ली: युद्ध के नौवें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ चल रहे इस अभियान को कब रोकना है, यह फैसला वे इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मिलकर करेंगे. ट्रंप ने कहा कि दोनों नेता नियमित संपर्क में हैं और ईरान को पहले ही काफी नुकसान पहुंचाया जा चुका है.
उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान अगर नहीं रुका तो और सख्त कार्रवाई होगी. क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहा है, खाड़ी देशों में हमले हो रहे हैं और मौतों का सिलसिला जारी है. ट्रंप का मानना है कि उनके और नेतन्याहू के नेतृत्व में ही इजरायल सुरक्षित रहा.
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा- 'यह फैसला म्यूचुअल है... थोड़ा बहुत. हम बात कर रहे हैं. सही समय पर मैं फैसला लूंगा, लेकिन सब कुछ ध्यान में रखा जाएगा.' उन्होंने जोर दिया कि ईरान इजरायल और आसपास के इलाकों को नष्ट करने की योजना बना रहा था, लेकिन उनके संयुक्त प्रयासों से ऐसा होने से रोका गया. ट्रंप ने पूछे जाने पर कहा कि इजरायल अमेरिका के फैसले के बाद भी युद्ध जारी रख सकता है या नहीं, यह जरूरी नहीं होगा. दोनों नेता ईरान में नए नेतृत्व पर भी अमेरिकी मंजूरी की बात कर रहे हैं.
युद्ध अब नागरिक को भी सीधा प्रभावित कर रहा है. बहरीन ने ईरान पर आरोप लगाया कि उसने एक डिसेलिनेशन प्लांट पर हमला किया, जो खाड़ी देशों के पीने के पानी के लिए अहम है. तेहरान में इजरायली हमलों से तेल डिपो जल रहे हैं और पर्यावरण को खतरा है. अरब लीग के प्रमुख ने ईरान की 'लापरवाह नीति' की निंदा की. ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले बढ़ाने की धमकी दी है. सऊदी अरब में पहली मौतें हुईं, जहां एक आवासीय इलाके में प्रोजेक्टाइल गिरने से दो विदेशी मजदूर मारे गए.
ईरान में अब तक कम से कम 1,230 लोग मारे गए हैं. लेबनान में 397 और इजरायल में 11 मौतें हुई हैं. अमेरिकी सेना ने बताया कि सऊदी अरब में ईरानी हमले से एक सैनिक की मौत हुई, कुल सात अमेरिकी सैनिक शहीद हो चुके हैं. इजरायल में दो सैनिक दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई में मारे गए. ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले बढ़ाने की बात कही है. खाड़ी देशों में विदेशी मजदूरों की मौतें ज्यादा हैं.
ट्रंप ने कहा कि ईरान में नया नेता बिना उनकी मंजूरी के ज्यादा दिन नहीं टिकेगा. युद्ध के मकसद बदलते दिख रहे हैं, लेकिन दोनों देश ईरान के खिलाफ अभियान जारी रखने के इरादे में हैं. क्षेत्र में तनाव चरम पर है और कोई स्पष्ट अंत नजर नहीं आ रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष लंबा खिंच सकता है.