ईरान लगातार अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जंग लड़ रहा है. ईरानी सैनिकों द्वारा मिडिल ईस्ट के कई देशों के अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिकी टीवी चैनल एनबीसी के 'मीट द प्रेस' में बड़ा बयान दिया है. उन्होंने रूस के साथ मजबूत संबंधों की पुष्टि की.
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि रूस ईरान को अमेरिकी सैनिकों और संपत्तियों की जानकारी दे रहा है. इसी बीच अराघची ने कहा कि ईरान और रूस की साझेदारी आज से नहीं बल्कि बहुत पुरानी और अच्छी है. उन्होंने कहा कि यह सहयोग नया नहीं है और आगे भी जारी रहेगा.
ईरानी मंत्री ने साफ कहा कि ईरान और रूस के बीच सैन्य सहयोग पुराना है, यह कोई रहस्य नहीं बल्कि स्पष्ट है. उन्होंने दावा किया कि रूस हमें कई तरीकों से मदद कर रहा है. हालांकि, उन्होंने विशिष्ट खुफिया जानकारी पर टिप्पणी से इनकार किया. लेकिन अमेरिकी सूत्रों का मानना है कि रूस मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों की लोकेशन शेयर कर रहा है. इससे ईरान को हमलों में मदद मिल रही है. खुफिया रिपोर्टों के आधार पर ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों की रेंज जानबूझकर 2000 किलोमीटर तक सीमित रखी है.
अराघची ने इस जंग को शांत कराने की बात को लेकर कहा कि ईरान दुनिया के लिए खतरा नहीं बनना चाहता, इस रेंज में पूरा मिडिल ईस्ट और पूर्वी यूरोप का कुछ हिस्सा आता है. हालांकि उन्होंने अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलों के दावों को खारिज किया और कहा कि ऐसा कोई प्लान नहीं है. उन्होंने कहा कि कोई सबूत भी नहीं कि ईरान लंबी दूरी की मिसाइल बना रहा है.
अराघची ने कहा कि इस युद्ध को हमपर थोपा गया है. हम आत्मरक्षा कर रहे हैं, जो की कानूनी अधिकार है. उन्होंने युद्ध विराम के बजाय स्थायी शांति स्थापित करने की मांग की. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हमलावरों को यह पहले बताना होगा कि उन्होंने आक्रामकता शुरू क्यों की? साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि ईरान अपने लोगों की सुरक्षा के लिए लड़ता रहेगा. अराघची ने 28 फरवरी को शजारेह तय्येबा स्कूल पर हुए हमले का भी जिक्र किया. जिसमें 165 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें ज्यादातर बच्चे थे. उन्होंने कहा कि इस हमले के सबूत अमेरिका की ओर इशारे करते हैं. साथ ही उ्न्होंने सवाल उठाया कि अगर अमेरिका नहीं, तो इसके पीछे कौन जिम्मेदार है.